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रामपुर बघेलान नगर परिषद में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर: ऑडिट रिपोर्ट में 95 लाख से अधिक का घोटाला, आदेश के बाद भी दोषियों से नहीं हुई वसूली

रामपुर बघेलान नगर परिषद में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर: ऑडिट रिपोर्ट में 95 लाख से अधिक का घोटाला, आदेश के बाद भी दोषियों से नहीं हुई वसूली

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 29, 2026, 8:19 PM IST

Updated On: Sep 29, 2026, 8:19 PM IST

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रामपुर बघेलान/सतना : सतना जिले की रामपुर बघेलान नगर परिषद में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। नगर परिषद की वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2019-20 में मुरूम बिछाने और साफ-सफाई के लिए जेसीबी (JCB) मशीनों का ठेका बाजार दर से काफी ऊंची दरों पर दिया गया। नियमों को दरकिनार कर ठेकेदार फर्म को 95 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जिसमें से लगभग 24 लाख रुपये से अधिक की राशि का अधिक (ओवर) भुगतान हुआ है।
बाजार दर से 500 रुपये प्रति घंटा महंगा दिया गया ठेका
ऑडिट रिपोर्ट के परिशिष्ट 08 और 09 के अनुसार, जांच में पाया गया कि नगर परिषद द्वारा मुरूम बिछाने का कार्य 1450 रुपये प्रति घंटा की दर से भुगताया गया, जबकि उस समय बाजार दर मात्र 950 रुपये प्रति घंटा थी। यानी सीधे तौर पर 500 रुपये प्रति घंटा का अतिरिक्त लाभ पहुँचाया गया। इसी प्रकार, कचरा निकासी और सफाई कार्य के लिए 350 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की बाजार दर के मुकाबले 410 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर का भारी-भरकम भुगतान किया गया।
फर्म बी. के. गुप्ता को नियम विरुद्ध किया गया 95 लाख का भुगतान
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान ठेकेदार ‘फर्म बी. के. गुप्ता’ को कुल 95,34,358 रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान किया गया। इसमें से 23,99,135.20 रुपये का सीधा-सीधा अधिक भुगतान (Overpayment) आंका गया है। ऑडिट रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से सरकारी राशि का दुरुपयोग माना गया है और संबंधित दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों से इस राशि की वसूली कर निकाय निधि में जमा कराने तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
वसूली पर लगा अघोषित ब्रेक, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में वसूली और सख्त विभागीय कार्रवाई के स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद, महीनों बीत जाने के बाद भी दोषियों से एक रुपये की रिकवरी नहीं हो सकी है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की टालमटोल नीति और लीपापोती को लेकर स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों में खासा आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग इस बड़े घोटाले पर संज्ञान लेकर दोषियों से वसूली और एफआईआर दर्ज कराने जैसी ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।
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