सतना: रिश्ते को कलंकित करने वाले एक बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज आपराधिक मामले में सतना के विशेष पॉक्सो (POCSO) न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने अपनी बीमार दादी के पास सो रही नाबालिग भतीजी के साथ दुष्कर्म करने वाले सगे बड़े पापा (ताऊ) को दोषी करार देते हुए “शेष प्राकृतिक जीवनकाल” (आजीवन कारावास) तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास का अर्थ अभियुक्त के जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा। इसके साथ ही दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

धमकी के खौफ में महीनों छिपा रहा दर्द, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए घटनाक्रम के अनुसार:
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बीमार दादी के पास सोते समय वारदात: वर्ष 2025 में आषाढ़ के महीने में पीड़िता अपनी बीमार और कम सुनने वाली दादी के साथ सो रही थी। इसी दौरान आरोपी ताऊ ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
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रक्षाबंधन के बाद दोबारा ज्यादती: रक्षाबंधन के दौरान दादी के निधन के करीब 15 दिन बाद आरोपी ने बालिका को फिर अपनी हवस का शिकार बनाया।
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पेट बढ़ने पर मां को बताई आपबीती: डर और धमकी के कारण सहमी बालिका महीनों तक चुप रही। जब पीड़िता गर्भवती हो गई और पेट बढ़ने लगा, तब 7 मई 2025 को मां द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर मासूम ने पूरी खौफनाक दास्तान बयां की।
सिंहपुर थाना पुलिस की ठोस विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी
पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर सिंहपुर थाने में अपराध क्रमांक 124/2025 दर्ज कर पुलिस ने त्वरित अनुसंधान किया और आरोपी को गिरफ्तार कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की। राज्य सरकार ने इस केस को ‘चिह्नित सनसनीखेज प्रकरण’ की श्रेणी में रखा था।
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो/एडीपीओ निशिकांत झा (उपसंचालक अभियोजन मोहम्मद शेख वसीम के मार्गदर्शन में) ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 17 महत्वपूर्ण साक्षियों के बयान दर्ज कराए और 36 डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सख्त सजा सुनाई।
मामले एवं अदालती फैसले का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| थाना / जिला | थाना सिंहपुर (जिला सतना) |
| मामला / अपराध क्र. | पॉक्सो एक्ट एवं दुष्कर्म (अपराध क्र. 124/2025) |
| न्यायालय | विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट), सतना |
| सुनाई गई सजा | शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास |
| अर्थदंड (जुर्माना) | ₹25,000/- |
| विशेष लोक अभियोजक | निशिकांत झा (एडीपीओ) |
अदालत का कड़ा संदेश
पॉक्सो कोर्ट के इस कठोर फैसले से समाज में बेटियों की सुरक्षा और घर के भीतर छिपे दरिंदों के खिलाफ एक कड़ा और कड़ा संदेश गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ‘अंतिम सांस तक जेल’ की सजा दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने का काम करेगी।









