13 साल का इंतजार और कलेक्ट्रेट गेट पर ‘दंडवत’ विलाप: सिंगरौली में सड़क न बनने से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; सरपंच पति संजय वर्मा जमीन पर लेटे, प्रशासन ने दिया विधिक आश्वासन

सिंगरौली: विकास के तमाम दावों और नारों के बीच विंध्य अंचल के सिंगरौली जिले से प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीणों के सब्र के बांध टूटने की एक बेहद झकझोर देने वाली विधिक व सामाजिक तस्वीर सामने आई है। जिले के ग्राम काम (महेला) में पिछले १३ वर्षों से लंबित पड़ी एक संपर्क सड़क के निर्माण को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में ग्रामीणों ने अनूठा और उग्र विरोध-प्रदर्शन किया। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब जिला प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंगी, तो आक्रोशित सरपंच पति संजय कुमार वर्मा कलेक्ट्रेट के मुख्य विधिक द्वार पर ही सीधे दंडवत लेट गए। इस अनोखे और मार्मिक प्रदर्शन को देखकर कलेक्ट्रेट अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आला अफसरों को विधिक मोर्चा संभालना पड़ा।

पीएमजीएसवाई तिलैया मार्ग से जुड़ना था संपर्क रास्ता; बरसात में ‘नर्क’ बन जाता है गांव

ग्रामीणों और सरपंच संघ के विलेखों के अनुसार, इस मैदानी विमर्श और समस्या की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • १३ साल पहले पास हुई थी सड़क: ग्रामीणों ने कड़े विधिक लहजे में बताया कि उनके गांव (काम-महेला, ओंकारबालांड, पोस्ट निवारा) को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत मुख्य ‘तिलैया मार्ग’ से जोड़ने वाली संपर्क सड़क को प्रशासनिक व विधिक स्वीकृति करीब १३ वर्ष पहले ही मिल चुकी थी। लेकिन कतिपय विभागीय भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते आज तक धरातल पर एक गिट्टी भी नहीं डाली जा सकी।
  • मरीजों और बच्चों की जान आफत में: वर्तमान में मानसून की दस्तक के साथ ही यह पूरा कच्चा रास्ता गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी नारकीय है कि स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, एम्बुलेंस और किसानों का पैदल निकलना भी विधिक रूप से एक दुःस्वप्न जैसा हो गया है।

“केवल आश्वासन से नहीं चलेगा काम, समय-सीमा करो सार्वजनिक” — सरपंच सुमित्रा देवी वर्मा का कड़ा रुख

प्रशासन के समक्ष ग्रामीणों ने अपनी विधिक और व्यावहारिक कड़ियाँ जोड़ते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. शुरू हो वैकल्पिक विधिक बंदोबस्त: सरपंच सुमित्रा देवी वर्मा ने कहा कि वे सालों से जनप्रतिनिधियों और अफसरों की चौखट पर विधिक आवेदन देकर थक चुकी हैं। उन्होंने मांग की है कि जब तक पक्की सड़क का टेंडर और निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक बारिश के तीन महीनों में आवागमन के लिए मुरुम डालकर वैकल्पिक विधिक रास्ता सुनिश्चित किया जाए।
  2. लापरवाह अफसरों पर तय हो विधिक जवाबदेही: ग्रामीणों ने सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि सड़क निर्माण प्रारंभ करने की अंतिम विधिक समय-सीमा (Dead-Line) को सार्वजनिक किया जाए। यदि इस बार भी केवल कागजी आश्वासन देकर गुमराह किया गया, तो पूरे अंचल के ग्रामीण कलेक्ट्रेट का अनिश्चितकालीन विधिक घेराव कर चरणबद्ध चक्काजाम आंदोलन करने को विवश होंगे।

प्रशासनिक विंग ने मौके पर पहुंचकर लिया विधिक ज्ञापन; नियमानुसार त्वरित कार्रवाई का भरोसा

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —

“कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर सरपंच पति संजय कुमार वर्मा के दंडवत लेटने की खबर जैसे ही चैंबर के भीतर पहुंची, कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ विधिक और प्रशासनिक अधिकारी दल-बल के साथ सीधे गेट पर पहुंचे.

अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों से विस्तृत विनिमय चर्चा की और उन्हें जमीन से उठाकर पानी पिलाया. प्रशासन की विंग ने ग्रामीणों का मांग पत्र विधिक पावती के साथ स्वीकार करते हुए लोक निर्माण और पीएमजीएसवाई विभाग के अभियंताओं को तत्काल एस्टीमेट री-वेरिफिकेशन और मैदानी तकनीकी जांच के कड़े विधिक निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद फिलहाल ग्रामीणों ने अपना धरना स्थगित किया है।”

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