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मैहर के घोरबई में बेजुबान के लिए देवदूत बने गौ-सेवक: अंधेरी रात में गहरे कुएं में गिरी गाय; ग्रामीणों और समाजसेवियों ने रस्सियों के सहारे घंटों विधिक मशक्कत कर सुरक्षित निकाला बाहर

मैहर के घोरबई में बेजुबान के लिए देवदूत बने गौ-सेवक: अंधेरी रात में गहरे कुएं में गिरी गाय; ग्रामीणों और समाजसेवियों ने रस्सियों के सहारे घंटों विधिक मशक्कत कर सुरक्षित निकाला बाहर

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The Khabrilal

Published On: Jul 8, 2026, 7:40 PM IST

Updated On: Jul 8, 2026, 7:40 PM IST

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मैहर/घोरबई: मैहर जिले के देहात अंचल अंतर्गत आने वाले ग्राम घोरबई से मानवीय संवेदनशीलता, जीव दया और अटूट गौ-प्रेम को प्रदर्शित करने वाली एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहाँ मंगलवार की रात एक बेजुबान गाय अचानक पैर फिसलने के कारण एक गहरे सूखे कुएं में जा गिरी। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, लेकिन अंचल के सजग युवाओं और समाजसेवियों ने बिना वक्त गंवाए एक बेहद कड़ा और जोखिम भरा विधिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घंटों की भारी मशक्कत के बाद अंततः गाय को सुरक्षित और सकुशल बाहर निकाल लिया गया।

मंगलवार रात ७:३० बजे अचानक हुआ हादसा; अंधेरे में गूंजी बेजुबान की कराह

ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सफल रेस्क्यू अभियान की कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • अचानक कुएं में समाई गाय: वारदात मंगलवार रात करीब ७:३० बजे की बताई जा रही है। घोरबई गांव के रिहायशी इलाके के पास से गुजर रही एक गाय अंधेरा होने के कारण सड़क किनारे बने कुएं की विलेज बाउंड्री को भांप नहीं पाई और सीधे गहरे कुएं में जा गिरी।
  • ग्रामीणों ने तुरंत बजाया अलार्म: कुएं के भीतर से गाय की आवाजें सुनने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत टॉर्च की रोशनी से स्थिति का विधिक मुआयना किया और तत्काल अंचल के सक्रिय गौ-सेवा संगठनों और जागरूक युवाओं को इसकी मोबाइल इनपुट के जरिए सूचना दी।

आशीष, हर्ष और रज्जन शुक्ला ने संभाली कमान; रस्सियों के सहारे कड़े विधिक रेस्क्यू से मिली कामयाबी

सूचना मिलते ही मैहर अंचल के प्रमुख समाजसेवी और गौ-भक्त बिना कोई सरकारी विधिक औपचारिकता का इंतजार किए सीधे घटनास्थल पर पहुंच गए:

  1. बनाया गया सुरक्षा घेरा: मौके पर पहुंचे आशीष तिवारी, हर्ष तिवारी, रज्जन शुक्ला और उनके साथी समाजसेवियों ने कुएं के भीतर उतरने के लिए रस्सियों और सुरक्षा बेल्ट की विधिक व्यवस्था की। ग्रामीणों की भारी भीड़ की मौजूदगी में युवाओं की टीम ने सूझबूझ से कुएं के भीतर रस्सियों का जाल उतारा।
  2. घंटों चला जीवन और मौत का संघर्ष: रात के घने अंधेरे और कुएं की गहराई के कारण रेस्क्यू विंग को शुरुआत में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन युवाओं के अटूट हौसले के आगे मुश्किलें छोटी साबित हुईं। टीम ने विधिक सुरक्षा मापदंडों का पालन करते हुए गाय के पेट और पैरों के नीचे रस्सियों का मजबूत ग्रिप बनाया और दर्जनों ग्रामीणों के सामूहिक बल से भारी-भरकम गाय को धीरे-धीरे ऊपर खींचना शुरू किया।

सुरक्षित बाहर आते ही गूंजे ‘गौ माता की जय’ के नारे; अंचल के नागरिकों ने की मानवीय संवेदनशीलता की सराहना

प्रशासनिक मुस्तैदी और ग्रामीण एकता की कड़ियाँ —

“कई घंटों की लगातार रीढ़-तोड़ मेहनत के बाद जब गाय को बिना किसी गंभीर चोट के कुएं से विधिक रूप से बाहर निकाल लिया गया, तो मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने राहत की सांस ली. पूरा परिसर गौ माता के जयकारों से गूंज उठा.

घोरबई और मैहर अंचल के प्रबुद्ध नागरिकों ने आशीष तिवारी और उनकी पूरी टीम के इस त्वरित विधिक व मानवीय प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की है. ग्रामीणों ने कहा कि आज के दौर में जब लोग बेजुबानों के प्रति उदासीन हो रहे हैं, ऐसे समय में इन युवाओं ने आधी रात को अपनी जान जोखिम में डालकर सनातन संस्कृति और जीव रक्षा का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। पशुपालन विभाग के स्थानीय विंग को भी गाय के प्राथमिक विधिक स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सूचित कर दिया गया है।”

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