भोपाल में ‘यंग इंडियंस पार्लियामेंट 2026’ का भव्य समापन: विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर बोले— अधिकार के साथ कर्तव्यों का संतुलन ही लोकतंत्र की असली ताकत; राजनीति का मूल उद्देश्य केवल सत्ता नहीं, सेवा

भोपाल: देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मूल्यों को युवा पीढ़ी के भीतर सिंचित करने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में आयोजित दो दिवसीय ‘यंग इंडियंस पार्लियामेंट 2026’ (Young Indians Parliament) का बुधवार को गरिमापूर्ण समापन हो गया। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस विशेष विधिक व विनिमय सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने देश के भावी कर्णधारों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अधिकारों की मांग न करें, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने विधिक कर्तव्यों को समझकर एक जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक के रूप में भारत के नवनिर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।


स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का परिणाम है अभिव्यक्ति की आजादी; इतिहास का अध्ययन जरूरी

विधानसभा परिसर में युवा सांसदों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राष्ट्र और संविधान की निम्नलिखित मुख्य कड़ियाँ रेखांकित कीं:

  • गर्व का विषय है हमारा लोकतंत्र: तोमर ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। हमारा यह लोकतंत्र केवल कागजी संविधान, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान या भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह उन असंख्य अमर स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और लहू का विधिक परिणाम है, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
  • अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू: उन्होंने युवाओं को विधिक सीख देते हुए कहा कि संविधान जितने अधिकार देता है, उतने ही कर्तव्यों का बोध भी कराता है। दोनों में से किसी एक की भी उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था को पंगु बना सकती है। समाज और संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाकर ही व्यक्ति देश के सर्वांगीण विकास में अपना विधिक इनपुट दे सकता है।

रोजगार तक सीमित न रहे शिक्षा; नई शिक्षा नीति से निखरेगा कौशल, 20 युवा राष्ट्रीय मंच पर दिखाएंगे प्रतिभा

आधुनिक शिक्षा पद्धति और युवाओं के नेतृत्व कौशल को लेकर भी मंच से महत्वपूर्ण रोडमैप साझा किया गया:

  1. संस्कारित नागरिक गढ़ना मूल लक्ष्य: विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा का अंतिम ध्येय केवल आजीविका या नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ना होगा। नई शिक्षा नीति (NEP) पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास पर केंद्रित है, जो युवाओं को किसी भी क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व (Leadership) स्थापित करने की विधिक शक्ति देती है।
  2. सार्वजनिक जीवन का ध्येय हो सेवा: राजनीति में रुचि रखने वाले युवाओं को सीख देते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति का असली विधिक दृष्टिकोण केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि अटूट समर्पण और जनकल्याण होना चाहिए।

यंग इंडियंस की चेयरपर्सन कुहू शर्मा और सीआईआई (CII) स्टेट हेड सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने संभाली कमान

प्रशासनिक मुस्तैदी और भोपाल के स्कूलों की विधिक कड़ियाँ —
“कार्यक्रम के आरंभ में यंग इंडियंस भोपाल की चेयरपर्सन कुहू शर्मा ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि भोपाल संभाग के 10 प्रतिष्ठित विद्यालयों से 150 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों ने इस युवा संसद में हिस्सा लेकर विधिक विमर्श किया. इसमें से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित 20 विद्यार्थी अब राष्ट्रीय स्तर के यंग इंडियंस पार्लियामेंट कार्यक्रम में मध्य प्रदेश का विधिक प्रतिनिधित्व करेंगे.
इस विधिक समापन सत्र के दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के स्टेट हेड सिद्धार्थ चतुर्वेदी सहित अनेक शिक्षाविद् और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. विधानसभा अध्यक्ष ने अंत में युवा प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच और तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति के मार्ग पर चलने का विधिक संदेश दिया।”


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