मैहर : विंध्य अंचल के नवगठित मैहर जिले से ग्रामीण विकास और पंचायती राज में चल रहे भ्रष्टाचार व घोर प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा अजूबा मामला सामने आया है, जिसे देखकर आप भी अपना सिर पकड़ लेंगे। मामला मैहर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कंचनपुर के ग्राम जहला का है। यहाँ ग्राम पंचायत द्वारा करौंदी मुख्य मार्ग से लेकर कुशवाहा परिवार के घर तक करीब 100 मीटर लंबी सीसी (Cement Concrete) सड़क का निर्माण कराया गया। इस निर्माण पर सरकारी खजाने से 2 लाख 90 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि विधिक रूप से फूंक दी गई, लेकिन गजब की इंजीनियरिंग का प्रदर्शन करते हुए निर्माण एजेंसी ने सड़क के ठीक बीचों-बीच खड़े बिजली के हाई-वोल्टेज खंभे को हटाए बिना ही उसके चारों तरफ सीमेंट कंक्रीट का जाल बिछा दिया। अब यह खंभा अंचल के नागरिकों के लिए ‘मौत का काल’ बनकर सड़क के बीचों-बीच सीना ताने खड़ा है।

सरपंच ने दिया था खंभा हटाने का झांसा; सालभर बाद भी जस की तस बनी है मुसीबत
ग्राउंड जीरो पर जब हमारी टीम ने ग्राम जहला के पीड़ित ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों से ‘वन-टू-वन’ (1-2-1) विधिक चर्चा की, तो भ्रष्टाचार की कई अन्य कड़ियाँ भी परत-दर-परत खुलकर सामने आईं:
- गाड़ियों के निकलने की जगह नहीं: स्थानीय ग्रामीण विजय पांडे ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि सड़क निर्माण शुरू होने से पहले सरपंच और सचिव ने वादा किया था कि वे बिजली कंपनी से विधिक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेकर खंभे को सड़क से बाहर शिफ्ट कराएंगे, उसके बाद ही ढलाई होगी। लेकिन अफसरों की मिलीभगत से खंभा वहीं छोड़ दिया गया, जिससे अब बड़े वाहनों का निकलना पूरी तरह बंद है और रात के अंधेरे में रोज राहगीर टकराकर चोटिल हो रहे हैं।
- नया पोल खड़ा, पुराना सड़क में जाम: एक अन्य स्थानीय निवासी रमेश पांडे ने बताया कि बिजली विभाग ने सड़क के बाहर नया खंभा गाड़कर नई केबल लाइन भी चालू कर दी है, लेकिन इस पुराने खंभे को बीच सड़क से उखाड़ने की जहमत आज तक किसी जिम्मेदार विधिक अधिकारी या लाइनमैन ने नहीं उठाई।
सालभर में ही उखड़ने लगी कंक्रीट; घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का भी गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की विधिक गुणवत्ता पर भी उंगली उठाई है:
- 15 दिन पहले शिफ्टिंग का सिर्फ दिखावा: बुजुर्ग ग्रामीण रामाधार पाण्डेय ने बताया कि सड़क बने लगभग सालभर बीत चुका है. सब-इंजीनियर (JE) साहब हर बार मौका मुआयना करने आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं कि दो दिन में खंभा हट जाएगा, लेकिन धरातल पर शून्य काम हुआ है.
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सड़क: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ₹2.90 लाख की इस योजना में तकनीकी मापदंडों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। निर्माण के कुछ महीनों के भीतर ही सड़क कई जगहों से दरक कर टूटने लगी है, जिससे साफ पता चलता है कि सीमेंट की जगह सिर्फ पीली मिट्टी और घटिया गिट्टी का खेल खेला गया है।
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, रिकवरी और विधिक कार्रवाई होगी— जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह
शासकीय धन का अपव्यय और प्रशासनिक हंटर —
“इस पूरे अजूबे विकास और भ्रष्टाचार की कड़ियों को जब विधिक साक्ष्यों व वीडियो फुटेज के साथ जिला पंचायत कार्यालय के समक्ष रखा गया, तो मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेन्द्र सिंह ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया.
जिला पंचायत सीईओ ने दोटूक विधिक बाइट देते हुए कहा— ‘मीडिया के माध्यम से कंचनपुर के जहला गांव का यह मामला मेरे संज्ञान में आया है. नियमानुसार सड़क का एलाइनमेंट (Alignment) पूरी तरह सुव्यवस्थित होना चाहिए था। यदि कोई खंभा, वृक्ष या अन्य अवरोध था, तो उसे सड़क के किनारे पटरी एरिया में शिफ्ट होना चाहिए था। सड़क के बीच में विद्युत पोल छोड़ना सीधे तौर पर शासकीय राशि का विधिक अपव्यय और घोर लापरवाही है। हमने तकनीकी जांच दल गठित कर दिया है। कंचनपुर पंचायत के सरपंच, सचिव और संबंधित सब-इंजीनियर (इंजीनियर) को विधिक कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आते ही दोषपूर्ण हिस्से का पुनर्निर्माण कराया जाएगा और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों से विधिक रिकवरी कर उनके खिलाफ दंडात्मक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।’“






