एमपी में मानसून की कछुआ चाल: पूर्वी मध्य प्रदेश में हालात ‘भयावह’, सामान्य से 35% कम बरसे बादल; क्या प्रशांत महासागर का ‘अल नीनो’ सोख रहा है आसमान का पानी?

भोपाल: मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी प्रदेश के कई हिस्सों में आसमान पूरी तरह सूखा है। मौसम केंद्र भोपाल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसमें भी सबसे ज्यादा ‘भयावह’ स्थिति पूर्वी मध्य प्रदेश की है, जहां बारिश का ग्राफ सामान्य से 57 प्रतिशत तक गिर गया है। मानसून की इस बेहद धीमी चाल के बीच दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की नजरें हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर पर टिक गई हैं, जहां तेजी से पनप रहा ‘अल नीनो’ भारतीय मानसून के लिए बड़ा खतरा बनता दिख रहा है।

पूर्वी एमपी में सूखा संकट, पश्चिमी जिलों में स्थिति बेहतर

मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 24.1 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 37.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।

  • पूर्वी एमपी का बुरा हाल: पूर्वी हिस्से में अब तक केवल 15.9 मिमी बारिश हुई है (सामान्य वर्षा 36.9 मिमी)। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में बालाघाट (-84%), मंडला (-80%), टीकमगढ़ (-76%), मैहर (-70%), अनूपपुर और दमोह (-69%) शामिल हैं, जहां सूखे जैसे हालात हैं।
  • पश्चिमी एमपी को राहत: पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा घाटा केवल 19 प्रतिशत है। यहाँ कई जिलों में मानसून पूर्व और शुरुआती चक्रवात से अच्छी बारिश हुई है। इनमें श्योपुर (+128%), नीमच (+111%), भोपाल (+106%), मुरैना (+89%) और अशोकनगर (+71%) शामिल हैं, जहां सामान्य से काफी अधिक पानी बरसा है।

देवास का खातेगांव सबसे ज्यादा भीगा, सतना की रातें सबसे गर्म

पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गई बारिश और तापमान के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  1. कहाँ कितना बरसा पानी: देवास जिले का खातेगांव 60 मिमी बारिश के साथ पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा। इसके अलावा बरेली (रायसेन) में 28 मिमी, तामिया (छिंदवाड़ा) में 25 मिमी, बैरसिया (भोपाल) में 26.4 मिमी, मुंगावली (अशोकनगर) में 24 मिमी और घोड़ाडोंगरी (बैतूल) में 20 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
  2. तापमान का उतार-चढ़ाव: बादलों और बूंदाबांदी के चलते हिल स्टेशन पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे यह प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका रहा। इसके विपरीत, सतना में न्यूनतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने सतना की रातों को पूरे प्रदेश में सबसे गर्म बना दिया। उमरिया में भी रात का पारा सामान्य से 5.5 डिग्री अधिक (29.1 डिग्री) रहा।

क्या है अल नीनो का चक्र और भारत के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता?

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक का विश्लेषण —

“मध्य प्रदेश में फिलहाल मानसून की चाल जरूर सुस्त है, लेकिन प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा ‘अल नीनो’ वैश्विक मौसम व्यवस्था के लिए एक बड़ा और चिंताजनक संकेत है। अल नीनो के कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक हवाओं का रुख बदलता है और भारत जैसे कृषि प्रधान देशों में सूखा या कम बारिश की स्थिति बनती है। यदि 2026 के अंत तक यह अल नीनो और मजबूत हुआ, तो वर्ष 2027 के मानसून पर इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है।”

राहत की उम्मीद: 4 सक्रीय प्रणालियां करा सकती हैं झमाझम बारिश

वर्षा घाटे के बावजूद मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगले 4 से 5 दिनों में मानसून रफ्तार पकड़ेगा। वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार तक पहुंच चुकी है। मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश कराने के लिए इस वक्त 4 प्रमुख मौसम प्रणालियां एक्टिव हैं:

  • पंजाब से बिहार तक बनी मौसमी द्रोणिका (ट्रफ लाइन)।
  • हरियाणा, पूर्वी यूपी, बिहार-झारखंड और असम के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation)।
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीधे तेलंगाना तक खिंची ट्रफ लाइन।
  • बंगाल की खाड़ी से केरल तक बनी ऊपरी वायुमंडलीय ट्रफ।

इन प्रणालियों के मजबूत होते ही मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। हालांकि, बदलती जलवायु के इस दौर में किसानों, सरकारों और जल प्रबंधन एजेंसियों को आने वाले संकट से निपटने के लिए अभी से सतर्क रहने की जरूरत है।

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