रीवा कलेक्ट्रेट में फूट-फूटकर रोईं मां-बेटी: देवर-देवरानी पर पैतृक संपत्ति छीनने और मकान पर अवैध कब्जे का आरोप; विमला सौंधिया ने कलेक्टर से मांगी जान-माल की सुरक्षा

रीवा: जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में मंगलवार (16 जून 2026) को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई उस समय बेहद भावुक और हंगामेदार हो गई, जब न्याय की आस में पहुंची एक बेबस मां-बेटी अधिकारियों के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़ीं। रायपुर कर्चुलियान तहसील के ग्राम देवरा फरेंदा की मूल निवासी और वर्तमान में बच्चों की खातिर जबलपुर में रह रही विमला सौंधिया ने अपने ही देवर और देवरानी पर प्रताड़ना, मारपीट और पुश्तैनी जायदाद हड़पने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। महिला ने रीवा कलेक्टर को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर अपनी पैतृक संपत्ति वापस दिलाने और दबंग रिश्तेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

पति की मौत के बाद शुरू हुआ जुल्म, 2007 में छोड़ना पड़ा था गांव

पीड़िता विमला सौंधिया द्वारा कलेक्टर के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, इस पारिवारिक विवाद और प्रताड़ना की पूरी इनसाइड स्टोरी इस प्रकार है:

  • 2005 में उठा पति का साया: विमला के पति स्व. श्रीनिवास सौंधिया की वर्ष 2005 में असमय मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद से ही घर में अकेलेपन का फायदा उठाकर उनके सगे देवर अवधेश सौंधिया और देवरानी सुलोचना सौंधिया ने विमला के साथ दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और जानलेवा मारपीट शुरू कर दी।
  • ताला तोड़कर किया कब्जा: प्रताड़ना से तंग आकर विमला सौंधिया ने साल 2007 में अपने मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए गांव छोड़ दिया और जबलपुर जाकर रहने लगीं। महिला का आरोप है कि उनके जाते ही देवर-देवरानी ने ससुराल वाले मकान का ताला तोड़कर उस पर अवैध कब्जा कर लिया और विमला की शादी का पूरा कीमती सामान व जेवरात अपने कब्जे में ले लिए।

2022 में बंटवारे का विरोध; दो कमरों के निर्माण पर भी दी जान से मारने की धमकी

जबलपुर में रहने के बावजूद जब महिला ने अपने बच्चों के हक के लिए आवाज उठाई, तो विवाद और ज्यादा हिंसक रूप लेने लगा:

  1. पैतृक हिस्से से इनकार: साल 2022 में जब खानदान में पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे (Partition) की आधिकारिक बात उठी, तो देवरानी सुलोचना ने विमला और उनके बच्चों को उनका न्यायसंगत हिस्सा देने से साफ मना कर दिया।
  2. जबरन कमरा छीनने का दबाव: हाल ही में जब विमला के बेटे ने गांव आकर अपने रहने के लिए दो कमरों का निर्माण कार्य शुरू कराया, तो आरोपियों ने निर्माण रुकवा दिया और एक कमरा जबरन अपने नाम करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर पूरे परिवार को सरेआम जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया गया।

मनिकवार चौकी पुलिस रही नाकाम; रीवा कलेक्टर ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

प्रशासनिक रुख एवं पीड़िता की मांग —

“पीड़ित महिला विमला सौंधिया ने बेहद भावुक होते हुए कलेक्टर को बताया कि उन्होंने इस पूरी प्रताड़ना और अवैध कब्जे की लिखित शिकायत स्थानीय मनिकवार पुलिस चौकी में भी दर्ज कराई थी। लेकिन रसूख और सांठगांठ के चलते स्थानीय पुलिस ने आज तक आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जिससे उनके हौसले और बुलंद हो गए। मंगलवार को रीवा कलेक्ट्रेट पहुंची मां-बेटी ने रोते हुए अपनी जान-माल की सुरक्षा, ससुराल के मूल मकान से अवैध कब्जा हटवाने और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पैतृक संपत्ति में अपना वैधानिक हिस्सा दिलाने की मांग की है।”

कलेक्टर कार्यालय में मां-बेटी के आंसू और शिकायती दस्तावेज देखने के बाद रीवा कलेक्टर ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल रायपुर कर्चुलियान के तहसीलदार और स्थानीय पुलिस प्रशासन को मौके पर जाकर जांच करने तथा नियमानुसार पीड़िता को उसका हक दिलाने व दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

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