उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर की शाही सवारी की शान और विंध्य-मालवा अंचल के लोगों के चहेते ‘श्यामू हाथी’ के स्वास्थ्य तथा उसके मालिकाना हक को लेकर छिड़ा कानूनी और प्रशासनिक विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। गुरुवार को उज्जैन के इंदौर रोड स्थित साईनाथ कॉलोनी में उस समय भारी हंगामा और हाईवोल्टेज ड्रामा खड़ा हो गया, जब पन्ना टाइगर रिजर्व, इंदौर और उज्जैन के वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की एक संयुक्त टीम हाथी का रूटीन चेकअप करने और उसका ब्लड सैंपल लेने पहुंची। हाथी के मालिक और उनके परिजनों ने टीम का तीखा विरोध करते हुए खून का नमूना देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

बिना ब्लड सैंपल लिए लौटी दिग्गजों की टीम
मौके पर करीब एक घंटे तक चली तीखी बहस और गहमागहमी के बाद जांच टीम को पीछे हटना पड़ा:
- केवल मल-मूत्र के सैंपल मिले: विरोध के चलते टीम खून का नमूना तो नहीं ले सकी, लेकिन जमीन पर मौजूद मल और मूत्र के नमूने (Samples) लेकर ही उन्हें संतोष करना पड़ा।
- जांच दल में शामिल थे ये बड़े नाम: इस विशेष रेस्क्यू और जांच दल में इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव, उज्जैन के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन और पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता शामिल थे।
‘चलते-चलते कभी भी गिर सकता है श्यामू’: डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
जांच करने पहुंचे वन्यजीव विशेषज्ञों ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए हाथी श्यामू की सेहत को लेकर बेहद डराने वाला और चौंकाने वाला दावा किया है:
डॉक्टरों की रिपोर्ट —
“हाथी श्यामू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ‘शेड्यूल-1’ श्रेणी का अति-सुरक्षित और प्रतिबंधित वन्यजीव है। प्रारंभिक तौर पर देखने से पता चलता है कि उसके पैरों में गंभीर संक्रमण और बीमारी है, जिसके कारण उसके पैर अब अंदर की तरफ मुड़ने लगे हैं। इस गंभीर स्थिति में वह भारी भीड़ के बीच चलते-चलते कभी भी अचानक गिर सकता है, जो बेहद खतरनाक है। बीमारी की सही गहराई जानने के लिए ही ब्लड टेस्ट जरूरी था।”
मालिक सरमन गिरी का पलटवार: ‘रसूखदारों की नजर है, वंतारा भेजने का ताना-बाना’
दूसरी ओर, हाथी के मालिक सरमन गिरी और उनके परिवार ने वन विभाग के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे गंभीर राजनैतिक और प्रशासनिक आरोप मढ़ दिए हैं। सरमन गिरी का कहना है:
- गुजरात के ‘वंतारा’ भेजने की तैयारी: “कुछ बड़े रसूखदार लोग, कॉर्पोरेट घराने और वन विभाग के आला अधिकारी मिलकर हमारे हाथी को जबरन यहां से छीनना चाहते हैं। उसे गुजरात के जामनगर स्थित ‘वंतारा’ (रिलायंस रिहैबिलिटेशन सेंटर) या किसी अन्य चिड़ियाघर में शिफ्ट करने के लिए जानबूझकर झूठी बीमारी का बहाना बनाया जा रहा है।”
- 2006 से है वैध मालिकाना हक: मालिक का तर्क है कि साल 2006 से इस हाथी का वैध लाइसेंस और स्वामित्व उनके पास है। वह 2016 के भव्य सिंहस्थ महाकुंभ से लेकर अब तक लगातार बाबा महाकाल की हर सवारी में पूरी तरह स्वस्थ होकर चल रहा है। अगर वह अनफिट है, तो खुद प्रशासन ने उसे सवारी में शामिल होने की अनुमति क्यों दी?
सितंबर 2025 से जारी है खींचतान: क्या छूटेगा बाबा का साथ?
उल्लेखनीय है कि श्यामू हाथी को लेकर वन विभाग और मालिक के बीच यह खींचतान आज की नहीं है, बल्कि सितंबर 2025 से लगातार जारी है। इससे पहले भी दो बार विशेषज्ञों की टीम उसे नेशनल पार्क या किसी सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर भेजने के लिए मुआयना करने आई थी, लेकिन हर बार स्थानीय जनता और महाकाल भक्तों के भारी विरोध के कारण विभाग को कदम पीछे खींचने पड़े थे। अब देखना यह होगा कि डॉक्टरों द्वारा लाए गए मल-मूत्र के सैंपल्स की लैब रिपोर्ट में क्या खुलासा होता है और क्या आगामी सावन मास में श्यामू एक बार फिर अवंतिका नगरी की सड़कों पर राजाधिराज महाकाल की अगवानी करेगा या उसे उज्जैन से विदा होना पड़ेगा।







