सतना (अतरबेदिया): मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल क्षेत्र में हलचल मचा दी है, बल्कि सामाजिक सोच पर भी एक गहरा प्रहार किया है। उचेहरा क्षेत्र के अतरबेदिया निवासी 70 वर्षीय रामलोटन कुशवाहा ने बुधवार को जीते जी अपनी ‘तेरहवीं’ का आयोजन कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। इस अनोखे आयोजन में पद्मश्री बाबूलाल दहिया सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक और रिश्तेदार साक्षी बने।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
इस अनूठे फैसले के पीछे की कहानी बेहद भावुक और समाज के दोहरे चरित्र को उजागर करने वाली है:
- देहदान का संकल्प: रामलोटन कुशवाहा ने कुछ समय पहले शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में अपनी मृत्यु के बाद ‘देहदान’ करने का संकल्प लिया था।
- समाज के कड़वे ताने: जैसे ही देहदान की खबर फैली, ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने सराहना करने के बजाय ताने देना शुरू कर दिया। लोगों ने कहा कि “तेरहवीं और क्रिया-कर्म का खर्च बचाने के लिए रामलोटन ने देहदान का नाटक किया है।”
- प्रयागराज में पिंडदान: इन टिप्पणियों से आहत होकर रामलोटन ने तय किया कि वे जीते जी अपनी सारी रस्में पूरी करेंगे। वे प्रयागराज गए, विधिवत अपना पिंडदान किया और फिर 13 मई (बुधवार) को तेरहवीं का भोज आयोजित किया।
पद्मश्री बाबूलाल दहिया और रिश्तेदारों ने कही यह बात
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध जैव विविधता संरक्षक पद्मश्री बाबूलाल दहिया विशेष रूप से शामिल हुए।
- बदली लोगों की सोच: जो लोग कल तक रामलोटन को खर्च बचाने का उलाहना दे रहे थे, तेरहवीं के भव्य आयोजन को देखकर उनके सुर बदल गए।
- सम्मान में बदली बातें: कार्यक्रम में मौजूद नाते-रिश्तेदार अब रामलोटन के देहदान के संकल्प को महान बताने लगे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने न केवल जीते जी अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने का जो संकल्प लिया है, वह अनुकरणीय है।
कौन हैं रामलोटन कुशवाहा?
रामलोटन कुशवाहा केवल इस आयोजन के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण के एक बड़े स्तंभ हैं:
- PM मोदी ने की तारीफ: उनके द्वारा दुर्लभ जड़ी-बूटियों और विलुप्त होती वनस्पतियों के संरक्षण के कार्यों की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ में कर चुके हैं।
- राज्य स्तरीय पुरस्कार: वर्ष 2024 में उन्हें जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रथम श्रेणी के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
- देशी म्यूजियम: उन्होंने अपने परिसर में एक अनूठा ‘देशी म्यूजियम’ तैयार किया है, जहाँ औषधीय पौधों का दुर्लभ संग्रह है।
निष्कर्ष: सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार
रामलोटन कुशवाहा का यह कदम यह संदेश देता है कि समाज चाहे कितना भी हतोत्साहित करे, नेक इरादों वाले लोग अपना रास्ता खुद चुनते हैं। उन्होंने न केवल तानों का मुंह बंद किया, बल्कि जीते जी मृत्युभोज कराकर यह सिद्ध कर दिया कि वे खर्च से डरकर नहीं, बल्कि सेवा के भाव से देहदान की ओर बढ़े हैं।




