मैहर/अमरपाटन: शहडोल के जंगलों से निकला हाथियों का एक जोड़ा पिछले तीन महीनों से विंध्य क्षेत्र के अलग-अलग जंगलों में विचरण कर रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, यह जोड़ा अब अमरपाटन वन परिक्षेत्र के तेंदुहटा और बम्हनी वन सीमा पर डटा हुआ है। हाथियों की मौजूदगी ने जहां ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है, वहीं वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह उत्सुकता का विषय बना हुआ है।

14 फरवरी से जारी है हाथियों का ‘सफर’
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, हाथियों का यह जोड़ा करीब 3 महीने पहले शहडोल से निकला था। इनका सफर किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं रहा है:
- शुरुआत: 14 फरवरी को शहडोल वन क्षेत्र से प्रस्थान।
- इन जिलों से गुजरे: सीधी, बढ़ौरा, हनुमना और गोविंदगढ़ के जंगलों में घूमते हुए यह जोड़ा मैहर जिले की सीमा में दाखिल हुआ।
- ताजा लोकेशन: 5 मई को मुकुंदपुर के पपरा पहाड़ में दिखने के बाद, अब इन्होंने तेंदुहटा और बम्हनी बीट के कक्ष क्रमांक 631 को अपना अस्थायी ठिकाना बनाया है।
ग्रामीणों में दहशत और उत्सुकता का माहौल
हाथियों के आने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया है। लोग हाथियों को देखने के लिए उत्सुक तो हैं, लेकिन जान-माल के नुकसान का डर भी बना हुआ है।
- वन विभाग की निगरानी: वन विभाग की टीमें हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।
- सुरक्षा के कड़े निर्देश: विभाग ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे अकेले जंगल या खेत की ओर न जाएं।
वन विभाग की अपील: हाथियों को न छेड़ें
अमरपाटन और मैहर वन परिक्षेत्र की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाथियों का यह जोड़ा फिलहाल शांत है और अपने प्राकृतिक मार्ग पर बढ़ रहा है।
“हमारी टीमें लोकेशन ट्रैक कर रही हैं। ग्रामीणों से अपील है कि हाथियों के करीब न जाएं और न ही उन्हें किसी तरह से परेशान करने या पत्थर मारने की कोशिश करें।” — वन विभाग अधिकारी
विंध्य में बदल रहा है हाथियों का कॉरिडोर?
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ और शहडोल के बाद अब हाथियों का विंध्य के जंगलों (रीवा, सतना, मैहर) की ओर रुख करना एक नए ‘एलीफेंट कॉरिडोर’ की ओर इशारा कर रहा है। अगर ये हाथी यहाँ स्थायी ठिकाना बनाते हैं, तो आने वाले समय में वन विभाग को मानव-हाथी द्वंद्व (Man-Elephant Conflict) रोकने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।




