गुना | मध्य प्रदेश के गुना स्थित क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय (Tatya Tope University) की साख पर उस वक्त बेहद गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए, जब छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की स्नातक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र किसी प्रोफेसर ने नहीं, बल्कि एआई (AI) ऐप चैट जीपीटी ने तैयार किए हैं। बीकॉम प्रथम वर्ष के ‘फाइनेंशियल अकाउंटिंग’ (वित्तीय लेखांकन) के पेपर में हुई इस बड़ी गड़बड़ी को छात्रों ने बकायदा एआई पर वही सिलेबस डालकर हूबहू पेपर जनरेट करके साबित भी कर दिया है।

मुख्य बिंदु
- 14-14 नंबर का गणित फेल: नियमानुसार 70 नंबर के पेपर को सभी 5 यूनिट्स में बराबर (14-14 अंक) बांटना था। लेकिन पूरा पेपर केवल शुरुआती सवा इकाई (1.2 Unit) तक ही सिमट कर रह गया।
- एआई का ‘शॉर्टकट’: छात्रों ने जब चैट जीपीटी पर सिलेबस फीड किया, तो एआई ने हूबहू वही पेपर बनाकर दे दिया जो विवि ने परीक्षा में बांटा था। इसमें पौने चार यूनिट्स को पूरी तरह गायब कर दिया गया।
- यूपी की प्राइवेट एजेंसी का ठेका: विवि ने गुना-अशोकनगर के स्थानीय वरिष्ठ प्रोफेसरों के बजाय प्रश्नपत्र बनाने और कॉपियां जांचने का पूरा जिम्मा उत्तर प्रदेश की एक निजी आउटसोर्स एजेंसी को दे रखा है।
- जांच का आश्वासन: विवाद बढ़ता देख विवि के परीक्षा नियंत्रक ने कहा है कि यदि छात्र सबूत देते हैं, तो पेपर बनाने वाली एजेंसी को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
चैट जीपीटी से कैसे खुली पोल? (छात्रों का लाइव डेमो)
बीकॉम फर्स्ट ईयर के वित्तीय लेखांकन के पर्चे को देखकर छात्र उस वक्त हैरान रह गए जब परीक्षा हॉल में उन्हें पूरे पाठ्यक्रम की जगह सिर्फ पहली और दूसरी यूनिट के ही सवाल थमा दिए गए। प्राचीन भारतीय परंपरा में संसाधनों का उपयोग, श्रम लागत और ठेका लागत जैसे महत्वपूर्ण अध्याय गायब थे।
इसके बाद छात्रों ने विवि की लचर व्यवस्था को बेनकाब करने के लिए तकनीक का ही सहारा लिया:
- सिलेबस फीडिंग: एक छात्र ने चैट जीपीटी ऐप पर बीकॉम का पूरा सिलेबस डाला और प्रश्नपत्र तैयार करने की कमांड दी।
- हूबहू कॉपी: एआई ने जो पेपर बनाकर स्क्रीन पर दिखाया, वह शब्द-दर-शब्द और प्रश्न-दर-प्रश्न बिल्कुल वैसा ही था जैसा परीक्षा में पूछा गया था। इससे साफ हो गया कि पेपर सेट करने वाले ने बिना कोई दिमाग लगाए इंटरनेट से कॉपी-पेस्ट का सहारा लिया था।
“योग्य प्रोफेसरों की कमी है या मशीनों के भरोसे चल रही पढ़ाई?”
इस गंभीर लापरवाही के बाद छात्रों और शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर तीखे सवाल दागे हैं:
- यदि पूरा पेपर केवल एक या दो यूनिट से ही सेट होना है, तो छात्र साल भर पांचों यूनिट की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत क्यों करें?
- क्या विश्वविद्यालय के पास प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों की कमी हो गई है, जो कॉपियां और भविष्य जांचने का काम बाहरी प्राइवेट एजेंसियों को बेचा जा रहा है?
विवि प्रबंधन का बचाव: “कभी-कभी हो जाता है ऐसा भ्रम”
इस बड़े खुलासे और छात्रों के आक्रोश पर क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रभात चौधरी ने कहा:
“अगर छात्र इस मामले में पुख्ता प्रमाण लेकर हमारे पास आते हैं, तो हम इसकी विस्तृत जांच कराएंगे और संबंधित पेपर सेट करने वाली एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करेंगे। हालांकि, कभी-कभी कई यूनिट्स के विषय आपस में मिलते-जुलते होते हैं, जिससे छात्रों को ऐसा भ्रम हो जाता है। फिर भी हम प्राचार्यों की कमेटी बनाकर इस पर विचार करेंगे।” > — प्रभात चौधरी, परीक्षा नियंत्रक
खबर का सारांश
- विवादित पर्चा: बीकॉम प्रथम वर्ष (वित्तीय लेखांकन)।
- आरोप: विशेषज्ञ प्रोफेसरों के बजाय चैट जीपीटी (एआई) से सीधे कॉपीड प्रश्नपत्र।
- लापरवाही: 5 यूनिट्स के बजाय केवल 1.2 यूनिट से ही पूरा 70 नंबर का पेपर बना दिया।
- जिम्मेदार: पेपर सेट करने का ठेका लेने वाली उत्तर प्रदेश की निजी एजेंसी।







