ग्वालियर में होटल के कमरे से चल रहा था ‘इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड’: क्राइम ब्रांच ने दबोचे 4 छात्र; मोबाइल में मिले पाकिस्तानी नंबर, गरीब खातों से घुमाते थे करोड़ों रुपये

ग्वालियर | ग्वालियर की क्राइम ब्रांच पुलिस ने एक बेहद शातिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर ठग गिरोह का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है। शहर के पॉश इलाके कैलाश विहार के एक होटल रूम में बैठकर ठगी का जाल बिछाने वाले चार छात्रों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। चौकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल में पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले कई संदिग्ध नंबर और चैट्स मिले हैं, जिसके बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं।

मुख्य बिंदु

  • पढ़ाई के बहाने ‘ठगी का धंधा’: गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी कॉलेज छात्र हैं, जो रईसी की जिंदगी जीने के लिए होटल का कमरा किराए पर लेकर साइबर फ्रॉड चला रहे थे।
  • पाकिस्तान कनेक्शन: आरोपियों के फोन से कुछ ऐसे इंटरनेशनल कॉल्स और चैट्स के सुराग मिले हैं, जिनमें पाकिस्तान का कंट्री कोड दिखाई दे रहा है।
  • म्यूल अकाउंट का खेल: ठगी की रकम को सीधे अपने खाते में मंगाने के बजाय ये आरोपी गरीब और जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों (Mule Accounts) का इस्तेमाल कर पैसे ट्रांसफर करते थे।
  • एमपी-राजस्थान के ठग: पकड़े गए ठगों में एक मुरैना, एक धौलपुर (राजस्थान) और दो ग्वालियर के रहने वाले हैं।

कैलाश विहार के होटल में दबिश, मिला बारूद जैसा ‘डिजिटल डेटा’

ग्वालियर क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कैलाश विहार के एक होटल के कमरे में कुछ बाहरी लड़के संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। पुलिस ने जब तड़के अचानक छापा मारा, तो कमरे के अंदर का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। कमरे से कई हाई-टेक लैपटॉप, दर्जनों स्मार्टफोन, फर्जी नाम-पते पर चालू की गई सिम कार्ड और कई एटीएम (ATM) कार्ड जब्त किए गए हैं।

लोकेशन का फर्जीवाड़ा या देशद्रोह की साजिश? जांच में जुटी एजेंसियां

आरोपियों के मोबाइल में पाकिस्तानी नंबर मिलने के बाद ग्वालियर पुलिस हर पहलू पर बारीकी से काम कर रही है।

  1. तकनीकी जांच: पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आरोपी सच में पाकिस्तान के किसी आका के संपर्क में थे, या फिर वीपीएन (VPN) और वीओआईपी (VoIP) जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी लोकेशन दिखा रहे थे।
  2. फॉरेंसिक लैब: जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है ताकि डिलीट किया गया डेटा और चैट हिस्ट्री रिकवर की जा सके।

सावधान! गरीबों के खातों को बनाते थे ढाल

जांच में यह भी सामने आया है कि ये ठग ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे। जैसे ही देश के किसी कोने से ठगी की वारदात होती, पैसा सीधे इन्हीं ‘म्यूल अकाउंट्स’ में ट्रांसफर होता और ये ठग अलग-अलग एटीएम से कैश निकालकर रफूचक्कर हो जाते थे।


खबर का सारांश

  • लोकेशन: होटल रूम, कैलाश विहार (ग्वालियर)।
  • गिरफ्तार ठग: 4 कॉलेज छात्र (मुरैना, धौलपुर और ग्वालियर निवासी)।
  • जब्ती: भारी मात्रा में सिम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल और एटीएम कार्ड।
  • बड़ा सुराग: फोन में पाकिस्तान कंट्री कोड (+92) के नंबर और संदिग्ध मैसेज।

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