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सीधी जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता और नवजात की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा: डॉक्टर पर ₹20000 की रिश्वत मांगने और गलत इंजेक्शन लगाने के गंभीर आरोप; पोस्टमार्टम हाउस पर भारी पुलिस बल तैनात

सीधी जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता और नवजात की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा: डॉक्टर पर ₹20000 की रिश्वत मांगने और गलत इंजेक्शन लगाने के गंभीर आरोप; पोस्टमार्टम हाउस पर भारी पुलिस बल तैनात

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The Khabrilal

Published On: Jul 15, 2026, 9:14 PM IST

Updated On: Jul 15, 2026, 9:14 PM IST

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सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी (Sidhi) जिला चिकित्सालय से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने वाली एक बेहद दुखद और संवेदनशील खबर सामने आई है। अस्पताल के मैटरनिटी विंग में प्रसव (Delivery) के दौरान एक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। मृतका की पहचान जिले के सोनाखाड़ (Sonakhad) गांव की निवासी दयावती जायसवाल के रूप में हुई है। इस दोहरी मौत के बाद पीड़ित परिजनों ने ड्यूटी पर मुस्तैद डॉक्टरों के खिलाफ गंभीर विधिक आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में भारी हंगामा किया। मामले की संवेदनशीलता और तनाव को भांपते हुए प्रशासन ने पोस्टमार्टम हाउस के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।


परिजनों ने बयां किया विलेख; रिश्वत न देने पर गलत दवा देने का संगीन आरोप

सीधी जिला अस्पताल में घटित इस विदारक घटना की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • ₹20000 की विधिक मांग का आरोप: परिजनों ने कलेक्ट्रेट और पुलिस विंग को दिए बयान में आरोप लगाया है कि दयावती को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान वहां तैनात संबंधित डॉक्टर ने केस को सुचारू रूप से संभालने के एवज में परिजनों से 20000 रुपये की अवैध राशि (रिश्वत) की मांग की।
  • इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत: पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके द्वारा मांगी गई रकम देने में असमर्थता जताने के बाद, प्रसूता को कथित तौर पर एक गलत इंजेक्शन लगा दिया गया। दवा अंदर जाते ही महिला की शारीरिक कड़ियाँ तेजी से बिगड़ने लगीं और तड़पते हुए प्रसूता व गर्भस्थ शिशु दोनों ने दम तोड़ दिया।

आधिकारिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगा मौत का गणित; अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी

इस संवेदनशील मामले में चल रही प्रशासनिक और विधिक कड़ियाँ नीचे दी गई हैं:

  1. सुरक्षा की मुस्तैद कड़ियाँ: घटना के बाद अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ के साथ किसी भी अप्रिय विलेख को रोकने के लिए पुलिस महकमा तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। कोतवाली पुलिस की विंग ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम हाउस को छावनी में तब्दील कर दिया है, ताकि कानून-व्यवस्था की कड़ियाँ न टूटें।
  2. पुष्टि होना अभी बाकी: हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए ₹20000 की मांग और गलत दवा देने के आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक या विधिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित doctor और जिला अस्पताल प्रबंधन का पक्ष आना अभी बाकी है।

इस दुखद घटना का गणितीय एवं तार्किक विश्लेषण (Logical Matrix)

  • लंबित विधिक साक्ष्य: आरोपों की सत्यता सिद्ध करने के लिए डॉक्टरों के पैनल द्वारा की जाने वाली 1 पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच की कड़ियाँ सबसे अहम गणितीय साक्ष्य होंगी।
  • समय सीमा: स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, ऐसे गंभीर मामलों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को 7 से 15 दिनों के भीतर अपनी विधिक रिपोर्ट सौंपनी होती है।

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —
“मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालयीन सूत्रों के अनुसार, प्रसूता और नवजात की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम की अंतिम विधिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा. यदि जांच में लापरवाही या रिश्वतखोरी की कड़ियाँ सच पाई जाती हैं, तो दोषी डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।”


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