मैहर: आमतौर पर सरकारी अस्पतालों की छवि अव्यवस्था और संसाधनों की कमी से जोड़कर देखी जाती है, लेकिन मैहर जिले का रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इस धारणा को पूरी तरह बदल रहा है। यहां अनुपयोगी और कबाड़ समझे जाने वाले सामान को रीसायकल कर बेहद आकर्षक और उपयोगी वस्तुओं में तब्दील किया जा रहा है। अपने इसी अनूठे नवाचार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के मॉडल को लेकर यह अस्पताल पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

टूटे पलंग से बनीं कुर्सियां, प्लास्टिक बोतलों के बने गमले
अस्पताल में किए जा रहे नवाचारों और व्यवस्थाओं से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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कबाड़ का रचनात्मक उपयोग: अस्पताल परिसर में पड़े पुराने लोहे के टूटे पलंगों को मॉडिफाई करके आकर्षक और आरामदायक कुर्सियों में बदल दिया गया है। इसके अलावा बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलों और डिब्बों से सुंदर गमले, गुलदस्ते और सजावटी सामग्री तैयार की गई है।
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आकर्षक गार्डन और हर्बल पार्क: CHC परिसर में एक विस्तृत हर्बल गार्डन विकसित किया गया है, जहां विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। हरा-भरा वातावरण और रंग-बिरंगे पौधे इलाज कराने आने वाले मरीजों तथा उनके परिजनों को मानसिक सुकून प्रदान करते हैं।
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स्वच्छता और हरियाली के लिए मिले सम्मान: इस मॉडल स्वास्थ्य केंद्र को स्वच्छता, बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई स्तरों पर पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
टीम भावना और कुशल नेतृत्व की मिसाल
अस्पताल की इस सफलता का श्रेय पूर्व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ विनय कुमार रवि के कुशल नेतृत्व और वर्तमान प्रभारी डॉक्टर शिव प्रताप सिंह व पूरे मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की समर्पित टीम भावना को जाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद रचनात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर रामनगर CHC ने यह साबित कर दिया है कि निष्ठापूर्वक किया गया प्रयास किसी भी सरकारी संस्थान को उत्कृष्टता की मिसाल बना सकता है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
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स्थान: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रामनगर, जिला मैहर (मध्य प्रदेश)।
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मुख्य पहल: ‘कबाड़ से कमाल’ (वेस्ट मैनेजमेंट), हर्बल गार्डन का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण।
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प्रभाव: मरीजों के लिए सकारात्मक वातावरण, स्वच्छता व नवाचार हेतु विभिन्न पुरस्कार प्राप्त।

