
इंदौर के मंच पर उठे मध्य प्रदेश के 5 बड़े मुद्दे

1. 13% ओबीसी आरक्षण पर विवाद और रुकी नियुक्तियां
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मुद्दा: राजगढ़ की सपना गुर्जर और सतना के अखिल भारती क्रांति ने मुद्दा उठाया कि MPPSC समेत अन्य परीक्षाओं में कोर्ट का हवाला देकर 13% पदों को होल्ड रखा गया है। इसके चलते करीब 10 हजार पदों पर 1.87 लाख अभ्यर्थी पिछले 5 वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
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कानूनी स्थिति: 27% OBC आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष बेंच ने 5 अगस्त को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है।

2. 6 साल बाद भी नर्सिंग की डिग्री अधूरी
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मुद्दा: इंदौर की याशिका दानी ने बताया कि 2020 में दाखिला लेने के बावजूद वे 2026 में भी थर्ड ईयर में हैं। परीक्षाएं और परिणाम लटकने के कारण उन्हें कॉलेज फीस चुकाने के लिए कॉल सेंटर में काम करना पड़ रहा है।

3. शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग और 9 दिन से अनशन
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मुद्दा: वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग को लेकर चयनित अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत पिछले 9 दिनों से निर्जल अनशन पर हैं और उनकी हालत नाजुक है।
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सरकार की सफाई: स्कूल शिक्षा विभाग ने देर रात बयान जारी कर स्पष्ट किया कि परिणाम जारी होने के बाद कानूनी रूप से पद बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। विभाग ने कहा कि दीप्ति सिंह ठाकुर चयन/प्रतीक्षा सूची में नहीं हैं और नरेंद्र राजपूत अपनी श्रेणी (EWS) में कट-ऑफ रैंक से पीछे हैं।

4. आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
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मुद्दा: धार के रवि वास्कले ने बालाघाट में मलेरिया, डायरिया और खसरा जैसी बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत का दावा करते हुए स्वास्थ्य विभाग में बैकलॉग पद खाली रहने का आरोप लगाया।

5. पटवारी भर्ती जांच रिपोर्ट और छात्रों पर FIR का आरोप
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मुद्दा: देवास के रंजीत किसानवंशी ने आरोप लगाया कि पटवारी भर्ती परीक्षा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना नियुक्तियां कर दी गईं। MPPSC अभ्यर्थियों के धरने के बाद जब वे ज्ञापन देने पहुंचे तो उल्टे उनके और साथी राधे जाट के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।

सरकार का जवाब: रिजल्ट जारी होने के बाद पद बढ़ाने का प्रावधान नहीं
शनिवार देर रात स्कूल शिक्षा विभाग ने आधिकारिक बयान जारी किया। विभाग ने दीप्ति सिंह ठाकुर और नरेंद्र राजपूत को लेकर स्थिति साफ की।
दीप्ति सिंह ठाकुर: विभाग के मुताबिक, कर्मचारी चयन मंडल की चयन या प्रतीक्षा सूची में दीप्ति सिंह का नाम नहीं है। विभाग ने कहा कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पद बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
नरेंद्र राजपूत: विभाग के अनुसार, नरेंद्र ने EWS श्रेणी में परीक्षा दी थी। इस श्रेणी में अंतिम चयनित अभ्यर्थी की रैंक 3621 थी जबकि नरेंद्र की रैंक 5427 है। विभाग के मुताबिक, इस आधार पर वे नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।

मंच पर उठे मुद्दों और सरकार/बीजेपी के जवाब का तुलनात्मक ब्योरा
| क्रम | छात्र/युवा द्वारा उठाया गया मुद्दा | सरकार व भाजपा का आधिकारिक पक्ष |
| 1 | 13% OBC होल्ड पद: 10 हजार पदों पर नियुक्तियां अटकीं | मामला हाईकोर्ट में सुरक्षित; कोर्ट के निर्णय का इंतजार |
| 2 | नर्मिंग शिक्षा में देरी: 4 साल का कोर्स 6 साल में भी अधूरा | सत्र नियमित करने के लिए प्रशासनिक प्रयास जारी |
| 3 | शिक्षक भर्ती (वर्ग 2 व 3): पद वृद्धि हेतु निर्जल अनशन | नियम अनुसार रिजल्ट के बाद पद नहीं बढ़ाए जा सकते |
| 4 | पटवारी भर्ती धांधली: एक ही सेंटर से कई टॉपर्स | जांच आयोग के निष्कर्षों के बाद ही दी गईं नियुक्तियां |
| 5 | बीजेपी का आरोप | मंच पर आम छात्रों की जगह NSUI/कांग्रेस कार्यकर्ता खड़े थे |
कैलाश विजयवर्गीय और बीजेपी नेतृत्व का हमला
“अगर कांग्रेस को मध्य प्रदेश के सामान्य युवाओं पर जरा भी भरोसा होता, तो उन्हें अपने ही दलीय कार्यकर्ताओं को आम छात्रों का मुखौटा पहनाकर मंच पर खड़ा करने की नौबत नहीं आती। यह पूरा कार्यक्रम प्रायोजित राजनीतिक ड्रामा था।”










