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सतना जिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत: परिजनों का आरोप- ‘इजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत’; डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम

सतना जिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत: परिजनों का आरोप- ‘इजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत’; डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 20, 2026, 1:28 AM IST

Updated On: Sep 20, 2026, 1:28 AM IST

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सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में शुक्रवार (18 सितंबर 2026) की देर रात प्रसव के दौरान 20 वर्षीय प्रसूता और उसके नवजात शिशु की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल के ड्यूटी स्टाफ और नर्स पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का दावा है कि उल्टी की शिकायत पर नर्स द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद महिला की तबीयत बिगड़ी और उसकी जान चली गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शनिवार दोपहर डॉक्टरों की तीन सदस्यीय पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। वहीं, एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया ने जिला अस्पताल पहुंचकर सिविल सर्जन और गायनिक विभाग से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मैहर से रेफर होकर आई थी 20 साल की दीपांजलि

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैहर जिले के भदनपुर निवासी दीपांजलि साकेत (20 वर्ष) पत्नी शिवा साकेत को 16 सितंबर की रात सिविल अस्पताल मैहर से प्राथमिक उपचार के बाद सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यह उनका पहला प्रसव था।
17 सितंबर की दोपहर 2:17 बजे उन्हें जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था।

मृत शिशु को जन्म देने के बाद महिला की थमीं सांसें

अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी रिकॉर्ड के अनुसार:
  • मृत शिशु का जन्म: 18 सितंबर की रात करीब 11:20 बजे लेबर रूम में ड्यूटी सीनियर रेजिडेंट डॉ. स्वाति ने प्रसव कराया, लेकिन शिशु मृत ही पैदा हुआ।
  • अचानक गिरा ब्लड प्रेशर: प्रसव के तुरंत बाद दीपांजलि का ब्लड प्रेशर (BP) अचानक तेजी से गिरने लगा और उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी।
  • वेंटिलेटर सपोर्ट भी नहीं आया काम: हालत गंभीर होने पर उन्हें तत्काल हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया, लेकिन रात लगभग 11:30 बजे उनकी मौत हो गई।

परिजनों का आरोप: ‘इंजेक्शन लगते ही तेज दर्द से तड़पने लगी थी बेटी’

मृतका के पिता राजकुमार साकेत ने अस्पताल के ड्यूटी अमले पर सीधा आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
“मेरी बेटी को उल्टी आ रही थी, जिस पर ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने एक इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाते ही दीपांजलि को तेज दर्द हुआ और उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे आनन-फानन में लेबर रूम ले जाया गया, जहां जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” — राजकुमार साकेत (मृतका के पिता)

केस हिस्ट्री खंगाल रही पुलिस व अस्पताल प्रबंधन

जिला अस्पताल की गायनिक विभाग की एचओडी (HOD) डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि मामला बेहद दुखद है और प्रबंधन के संज्ञान में है। मृतका की भर्ती से लेकर मौत तक की पूरी केस हिस्ट्री और दिए गए ट्रीटमेंट चार्ट की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
सिविल सर्जन का कहना है कि डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
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