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सतना में आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों के फर्जीवाड़े की आशंका:7262 दावों की जांच में 313 केस मिले संदिग्ध कलेक्टर को गहन निरीक्षण के निर्देश

सतना में आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों के फर्जीवाड़े की आशंका:7262 दावों की जांच में 313 केस मिले संदिग्ध कलेक्टर को गहन निरीक्षण के निर्देश

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 17, 2026, 1:48 AM IST

Updated On: Sep 17, 2026, 1:48 AM IST

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सतना: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सतना जिले के निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर किए गए सरकारी भुगतान के दावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और घोटाले का मामला सामने आया है। राज्य स्तर पर की गई ‘संकेतक एवं जोखिम आधारित विश्लेषण’ (Risk Analysis) की रिपोर्ट में सतना के अस्पतालों के कुल 7,262 दावों की पड़ताल की गई, जिसमें से 313 मामले बेहद संदिग्ध पाए गए हैं। आयुक्त लोक स्वास्थ्य धनराजू एस ने सतना कलेक्टर को पूरी विश्लेषण रिपोर्ट साझा करते हुए संबंधित अस्पतालों का तत्काल गहन निरीक्षण करने और धोखाधड़ी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

प्रमुख अस्पतालों में संदिग्ध दावों की स्थिति

  1. दिवित हार्ट एंड मल्टी स्पेशलिटी: कुल 1,911 दर्ज दावों में से 59 केस संदिग्ध मिले हैं, जबकि यहां 19% पुष्ट धोखाधड़ी (Confirmed Fraud) के मामले दर्ज किए गए हैं।
  2. पावक अस्पताल: 985 दावों में से 46 मामले संदिग्ध पाए गए हैं, जिनमें 10% पुष्ट धोखाधड़ी की श्रेणी में हैं।
  3. सद्गुरु व जानकीकुंड चिकित्सालय: कुल 2,275 दावों में से 143 मामले संदिग्ध पाए गए हैं।
  4. सार्थक अस्पताल: 1,334 दावों में से 43 मामले संदिग्ध हैं।
  5. अन्य अस्पताल: आयुष्मान हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में 13 (कुल 377 में से) और मेडिकल मल्टी व टीएम अस्पताल में 6 मामले संदिग्ध मिले हैं।

बिना पूर्णकालिक डॉक्टर के चल रहा था अस्पताल

राज्य के जोखिम विश्लेषण में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकीकुंड चिकित्सालय में पूर्णकालिक (Full-time) डॉक्टरों की संख्या शून्य और केवल 1 विजिटिंग डॉक्टर दर्ज है, इसके बावजूद यहां सैकड़ों आयुष्मान दावों का भुगतान लिया गया।
इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के रिस्क स्कोर के आधार पर दिवित हार्ट (स्कॉयर 0.216) और सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय (स्कोर 0.179) को ‘मध्यम जोखिम श्रेणी’ (Medium Risk Category) में रखा गया है।

अस्पतालों के संदिग्ध आंकड़ों का पूरा गणित

कलेक्टर को दिए गए जांच के कड़े निर्देश

आयुक्त ने निर्देश दिया है कि जिन अस्पतालों में राज्य के औसत (4%) से अधिक संदिग्ध मामले हैं, उन पर विशेष फोकस किया जाए। जांच टीम अस्पतालों में जाकर:
  • वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं का भौतिक सत्यापन करेगी।
  • डॉक्टरों की उपस्थिति और ओपीडी रजिस्टरों का मिलान करेगी।
  • फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम पास कराने की जांच की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष: सार्थक हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि उनकी ओर से पूरा डेटा सही दिया गया है। शासन स्तर पर संदेह होने पर सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, जांच के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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