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रामनगर में ‘जननी’ और 108 सेवा की खुली पोल रेफर होते ही ‘खराब’ हुआ वाहन,क्या कागजों तक सीमित है 24 घंटे की सुविधा?

रामनगर में ‘जननी’ और 108 सेवा की खुली पोल रेफर होते ही ‘खराब’ हुआ वाहन,क्या कागजों तक सीमित है 24 घंटे की सुविधा?

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 22, 2026, 10:28 PM IST

Updated On: Sep 22, 2026, 10:39 PM IST

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सतना/रामनगर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं व गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए ‘जननी एक्सप्रेस’ और ‘108 एम्बुलेंस’ सेवा का दावा करती है। लेकिन मैहर-सतना जिले के रामनगर सिविल अस्पताल में इन दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। रामनगर में रात के समय इन आपातकालीन वाहनों की उपलब्धता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रेफर मरीज सामने आते ही चालक बोला- ‘गाड़ी खराब है’

ताजा मामला रामनगर अस्पताल परिसर का है, जहां एक गर्भवती महिला को हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने रीवा/सतना के लिए रेफर किया।
  • अचानक आई ‘तकनीकी खराबी’: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल परिसर में जननी वाहन (क्रमांक 8759) पहले से खड़ा था और चालक भी वहीं मौजूद था। लेकिन जैसे ही परिजनों ने मरीज को रेफर किए जाने की बात कही और गाड़ी ले जाने को कहा, चालक ने अचानक वाहन में तकनीकी खराबी होने की बात कह दी और मौके से खिसक गया।
  • उठे गंभीर सवाल: अगर वाहन वास्तव में खराब था, तो उसे अस्पताल परिसर में मरीजों के लिए तैयार स्थिति में क्यों खड़ा रखा गया था? और अगर वाहन चालू हालत में था, तो रेफर मरीज के सामने आते ही वह अचानक खराब कैसे हो गया?

रात होते ही गायब हो जाती हैं गाड़ियां; घरों में पार्क करने का आरोप

स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
  • घर ले जाते हैं वाहन: ग्रामीणों का आरोप है कि कई चालक रात होते ही वाहनों को अस्पताल परिसर में खड़ा करने के बजाय अपने-अपने घरों में ले जाकर पार्क कर देते हैं, जिससे आपात स्थिति में कॉल करने पर भी एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचती।
  • बहानेबाजी का खेल: रात के समय जब भी किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को एम्बुलेंस की जरूरत होती है, तो कहीं लाइट खराब होने, कहीं पंचर होने तो कहीं फ्यूल न होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है।

जांच के घेरे में स्वास्थ्य विभाग: ये हैं 5 बड़े सवाल

  1. जिम्मेदारी किसकी? रात के समय अगर किसी गर्भवती महिला को तत्काल रेफर किया जाए और सरकारी जननी वाहन या 108 उपलब्ध न हो, तो किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
  2. क्या 24×7 सुविधा सिर्फ कागजी? क्या जननी वाहन और 108 सेवा की 24 घंटे उपलब्धता का दावा सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया है?
  3. निगरानी प्रणाली ठप? क्या रात में वाहनों की वास्तविक लोकेशन (Real-time Location) और उनकी उपलब्धता की ब्लॉक या जिला स्तर पर कोई नियमित निगरानी होती है?
  4. GPS और लॉगबुक की जांच कब? क्या इन वाहनों के GPS ट्रैकिंग डेटा, लॉगबुक, कॉल रिकॉर्ड और रात में किए गए वास्तविक ट्रिप की कभी निष्पक्ष जांच की जाती है?
  5. बहानेबाजी या सच्चाई? स्वास्थ्य विभाग को इस पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित वाहन (क्रमांक 8759) वास्तव में खराब था या चालक ने मरीज को ले जाने से बचने के लिए खराबी का झूठा बहाना बनाया था?

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

यह सवाल सिर्फ एक वाहन या एक चालक की लापरवाही का नहीं है, बल्कि उस बेबस गर्भवती महिला और उसके नवजात की जिंदगी से जुड़ा है, जिसे जरूरत के वक्त घंटों सरकारी वाहन का इंतजार करना पड़ा या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। रामनगर क्षेत्र की जनता अब जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मांग कर रही है कि रामनगर में जननी एक्सप्रेस और 108 सेवा के नाइट ड्यूटी रोस्टर और वाहनों की फिटनेस की तुरंत जांच कराई जाए और दोषी चालकों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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