मैहर (नादन/जरियारी): मैहर जिले के नादन थाना अंतर्गत ग्राम जरियारी से सामने आई यह खबर प्रशासनिक दावों और निर्माण एजेंसी के भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ने वाली है। बुढेरुआ-जरियारी मार्ग पर बरगी नहर के ऊपर करीब 55 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुल पहली ही बारिश के झोंके को नहीं झेल सका और पूरी तरह ध्वस्त होकर नहर में समा गया। महज एक सप्ताह पहले इस पुल का एक पिलर करीब 4 इंच नीचे धंस गया था, जिसके बाद पुलिस व प्रशासन ने केवल बैरिकेडिंग लगाकर इतिश्री कर ली। समय रहते सुधार न किए जाने का परिणाम यह रहा कि अब पुल का स्लैब ही टूटकर नीचे गिर गया है, जिससे दो दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया है।

सड़क पर उतरे उग्र ग्रामीण: प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
पुल के पूरी तरह धराशायी होने के बाद जरियारी व आसपास के ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने जरियारी मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया और जिला प्रशासन व निर्माण एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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कोई सुरक्षित विकल्प नहीं: ग्रामीणों का कहना है कि पुल ध्वस्त होने के बाद अब इस मार्ग से आवागमन का कोई सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता नहीं बचा है। स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
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निष्पक्ष जांच की मांग: ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल सामग्री, डिजाइन और तकनीकी निगरानी की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार व इंजीनियरों पर FIR दर्ज करने की मांग उठाई है।
तकनीकी अनदेखी का खुला सच: 16mm की जगह लगी 10-12mm सरिया
पुल के ध्वस्त स्लैब से बाहर निकली छड़ों को देखकर निर्माण में हुई घोर लीपापोती उजागर हो गई है:
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अमानक सरिया: स्वीकृत तकनीकी ड्राइंग के अनुसार स्लैब में 16mm क्षमता की सरिया लगनी थी, लेकिन मौके पर जांच में 16mm का एक भी सरिया नहीं मिला; पूरे स्लैब में 10 से 12mm की बेहद कमजोर सरिया लगाई गई थी।
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गलत स्पेसिंग व पेडेस्टल का अभाव: सरियों के बीच की दूरी मापदंडों के विपरीत थी। पुल में न तो ‘पेडेस्टल’ दिया गया और न ही ‘एबटमेंट’ प्रॉपर तैयार किया गया।
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कॉम्पैक्शन व स्लोप की अनदेखी: स्लैब कास्टिंग के बाद बेस मिट्टी का कॉम्पैक्शन ठीक से नहीं किया गया, स्लैब में प्रॉपर स्लोप नहीं दिया गया और रेलगार्ड भी गायब थे।
अधिकारियों ने लिया जायजा, जांच के आदेश
पुल गिरने और ग्रामीणों के विरोध की सूचना मिलते ही नादन थाना पुलिस, तहसीलदार और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। सीएसपी मैहर महेंद्र सिंह ने दल-बल के साथ पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया।
वहीं, एनवीडीए (NVDA) के इंजीनियर रोहित सिंह और पीडब्ल्यूडी (PWD) की तकनीकी टीम ने पुल के ध्वस्त ढांचे का मुआयना किया। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी परीक्षण के बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।
घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| घटनास्थल | ग्राम जरियारी (थाना नादन, जिला मैहर) |
| प्रोजेक्ट व लागत | बुढेरुआ-जरियारी मार्ग पर बरगी नहर पुल (लागत ₹55 लाख) |
| प्रभावित क्षेत्र | 24 से अधिक गांव (आवागमन पूरी तरह बंद) |
| मुख्य तकनीकी कमियां | 16mm की जगह 10-12mm सरिया, एबटमेंट व पेडेस्टल की कमी, कॉम्पैक्शन न होना |
| निरीक्षण अधिकारी | सीएसपी मैहर महेंद्र सिंह, एनवीडीए इंजीनियर रोहित सिंह व राजस्व टीम |
सरकारी राशि के बंदरबांट पर उठे सवाल
पुल निर्माण के तुरंत बाद पहली ही बारिश में उसका ढह जाना यह साबित करता है कि जनता के टैक्स के ₹55 लाख रुपये किस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। अब देखना यह है कि मैहर जिला प्रशासन दोषियों पर क्या कठोर दंडात्मक कदम उठाता है।









