मैहर (रामनगर): मैहर जिले के रामनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़ा इटमा और खारा देवरा में लाल मुंह वाले उत्पाती बंदरों के आतंक से ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। प्रशासनिक और वन विभाग के स्तर पर लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान न निकलने से हताश ग्रामीणों ने अब एक चरम कदम उठाया है। समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने मैहर कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर ‘इच्छा मृत्यु’ (Euthanasia) की मांग की है। ग्रामीणों के इस अनोखे और गंभीर कदम के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

घरों में तोड़फोड़ और हमले का डर, जनजीवन अस्त-व्यस्त
ग्रामीणों के अनुसार, बड़ा इटमा और खारा देवरा गांवों में रोजाना दर्जनों लाल मुंह वाले बंदरों का झुंड धावा बोल रहा है:
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सामान का नुकसान: बंदर घरों की छतों को तोड़ रहे हैं, कमरों में घुसकर खान-पान और गृहस्थी का सामान तहस-नहस कर रहे हैं।
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हमले की आशंका: बंदरों के आक्रामक व्यवहार के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना और छतों पर जाना खतरनाक हो गया है।
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प्रशासनिक अनदेखी का आरोप: ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित में शिकायत दी गई, लेकिन केवल आश्वासन मिले और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ज्ञापन में चेतावनी: ‘समाधान नहीं तो इच्छा मृत्यु ही विकल्प’
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट लिखा है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा बंदरों के आतंक से उन्हें स्थायी मुक्ति नहीं दिलाई जाती, तो उनके पास इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता।
इस ज्ञापन के बाद मैहर जिला प्रशासन और वन मंडल के सामने इन प्रभावित गांवों से बंदरों को रेस्क्यू कर घने जंगलों में भेजने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| प्रभावित गांव | बड़ा इटमा एवं खारा देवरा (विकासखंड रामनगर, जिला मैहर) |
| मुख्य समस्या | लाल मुंह वाले (उत्पाती) बंदरों का निरंतर आतंक व तोड़फोड़ |
| ग्रामीणों की मांग | बंदरों को पकड़े जाने का स्थायी समाधान अथवा ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति |
| ज्ञापन प्रेषित | महामहिम राष्ट्रपति के नाम (मैहर कलेक्टर के माध्यम से) |
| प्रशासनिक स्थिति | वन विभाग द्वारा रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी |
राहत कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों के इस कड़े कदम के बाद अब सभी की निगाहें मैहर कलेक्टर और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों की मांग है कि वन विभाग तत्काल मथुरा या विशेषज्ञ मथुरा/भोपाल की टीमों को बुलाकर इन उत्पाती बंदरों को ट्रैप करे और सुरक्षित दूरस्थ वन क्षेत्रों में छोड़े।










