मैहर (रामनगर): मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में स्कूल शिक्षा विभाग के तहत हुए 4.37 करोड़ रुपये के बहुचर्चित स्कूल मेंटेनेंस और लघु निर्माण कार्य घोटाले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई की सुस्त रफ्तार पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले में तत्कालीन बीईओ (BEO) सहित 22 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था, लेकिन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से क्षेत्रीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।सूत्रों के मुताबिक, दर्ज एफआईआर के बाद से अब तक करीब 5 से 6 आरोपियों को ही अदालत से जमानत मिल सकी है, जबकि आरोपी बनाए गए कई अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों की जमानत अर्जी लंबित है।

मुख्य आरोपी पुलिस की पहुंच से दूर, स्कूलों में बेधड़क आवाजाही का आरोप
घोटाले की जांच और एफआईआर के बावजूद मामले के प्रमुख नामजद आरोपी अब तक सलाखों के पीछे नहीं पहुंच सके हैं:
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तत्कालीन BEO संतोष सिंह: पूरे मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) संतोष सिंह की भूमिका मुख्य मानी जा रही है, जिनकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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फरार ठेकेदार व सप्लायर: महाकाल ट्रेडर्स के ठेकेदार शुभम नायक, रुद्र इंटरप्राइजेज के ठेकेदार संजीव रजक और वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मटेरियल सप्लायर ‘लकी’ के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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लापरवाही पर सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि नामजद आरोपी होने के बावजूद संबंधित ठेकेदारों और सप्लायरों का क्षेत्र के स्कूलों में लगातार आना-जाना बना हुआ है, फिर भी पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है।
न रिकवरी हुई, न मुख्य आरोपियों को पकड़ा गया
करोड़ों रुपये के इस घोटाले में केवल कागजी कार्रवाई तक सिमटी जांच को लेकर कई बुनियादी सवाल खड़े हो रहे हैं:
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करोड़ों की वसूली पेंडिंग: फर्जी बिलिंग और घटिया निर्माण के जरिए गबन की गई ₹4.37 करोड़ की राशि की प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई रिकवरी (वसूली) शुरू नहीं हो सकी है।
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शिक्षकों में असंतोष: मैदानी कर्मचारियों और शिक्षकों का कहना है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज गिराई जा रही है, जबकि घोटाले के मुख्य योजनाकारों और ठेकेदारों को अभयदान मिला हुआ है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| घोटाले का स्वरूप | स्कूल मेंटेनेंस व लघु निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़ा |
| कुल फर्जीवाड़ा राशि | ₹4.37 करोड़ |
| संबंधित क्षेत्र | रामनगर विकासखंड (जिला मैहर, म.प्र.) |
| कुल नामजद आरोपी | 22 (शिक्षक, अधिकारी व ठेकेदार शामिल) |
| प्रमुख आरोपी (गिरफ्त से बाहर) | तत्कालीन BEO संतोष सिंह, शुभम नायक (महाकाल ट्रेडर्स), संजीव रजक (रुद्र इंटरप्राइजेज), लकी (वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर) |
| मौजूदा स्थिति | 5-6 को जमानत, मुख्य आरोपियों की धरपकड़ व शासकीय राशि की वसूली अधूरी |
कार्रवाई की सुस्त चाल पर उठे सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि ₹4.37 करोड़ के इस बड़े घोटाले में लिप्त BEO और ठेकेदारों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए तथा गबन की गई राशि की राजस्व वसूली (RRC) की प्रक्रिया शुरू की जाए। अब देखना यह है कि मैहर पुलिस प्रशासन आरोपियों की धरपकड़ के लिए क्या सख्त कदम उठाता है।









