रीवा: शहर के प्रतिष्ठित शासकीय ठाकुर रणमत सिंह (TRS ) महाविद्यालय में बुधवार को उस समय हंगामे जैसी स्थिति निर्मित हो गई, जब राजनीति विज्ञान विभाग में पूर्व में गेस्ट टीचर के रूप में सेवाएं दे चुके डॉ. शिवानंदन पयासी ने अपने विरोध का अनोखा और गंभीर तरीका अपनाया। सेवा से हटाए जाने और दोबारा नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज डॉ. पयासी ने अपना मुंडन कराया और कॉलेज के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर गलत दस्तावेज तैयार कर उनके अध्यापन कार्य को कम दर्शाने तथा इसी आधार पर उन्हें सेवा से बाहर करने का आरोप लगाया है।
डॉ. शिवानंदन पयासी का कहना है कि वे वर्ष 2018 से लगातार राजनीति विज्ञान विभाग में जनभागीदारी गेस्ट टीचर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लंबे समय तक महाविद्यालय में अध्यापन करने के बावजूद अब उन्हें दोबारा काम पर नहीं रखा जा रहा है। उनका दावा है कि विभाग में वर्तमान में 600 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, इसके बावजूद उनकी सेवाओं की आवश्यकता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
मुंडन कराकर कॉलेज गेट पर धरने पर बैठने की घटना के बाद महाविद्यालय परिसर में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई। डॉ. पयासी ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
2018 से राजनीति विज्ञान विभाग में दे रहे थे सेवाएं
डॉ. शिवानंदन पयासी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में जनभागीदारी गेस्ट टीचर के रूप में अध्यापन कार्य शुरू किया था। इसके बाद से वे लगातार विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम कर रहे थे।
उनका कहना है कि महाविद्यालय में लंबे समय तक सेवाएं देने के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। कई वर्षों तक अध्यापन कार्य करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि आगे भी महाविद्यालय में उन्हें अवसर मिलता रहेगा। लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें सेवा से हटा दिया गया।
डॉ. पयासी का आरोप है कि उनके अध्यापन कार्य और सेवाओं से संबंधित दस्तावेजों में वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में उनके पढ़ाने के कार्य को कम दर्शाया गया, जिसके आधार पर उन्हें दोबारा नियुक्ति से वंचित कर दिया गया।
गलत दस्तावेज तैयार कर सेवा से हटाने का लगाया आरोप
डॉ. शिवानंदन पयासी ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य और संबंधित विभागाध्यक्ष की ओर से ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनमें उनके अध्यापन कार्य को वास्तविकता से कम दिखाया गया।
उनका कहना है कि यदि उनके द्वारा किए गए कार्य और अध्यापन से संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों में कथित रूप से की गई गड़बड़ी के कारण उनके साथ अन्याय हुआ है।
डॉ. पयासी की मांग है कि उनके सेवाकाल और अध्यापन कार्य से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि उन्हें किस आधार पर सेवा से हटाया गया और दोबारा नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही है।
हालांकि, दस्तावेजों में गड़बड़ी और गलत जानकारी दर्ज किए जाने के उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कॉलेज प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है।
600 से अधिक विद्यार्थी, फिर भी दोबारा नहीं मिला पढ़ाने का मौका
डॉ. पयासी ने राजनीति विज्ञान विभाग में विद्यार्थियों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभाग में 600 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के होने के बावजूद उन्हें दोबारा अध्यापन कार्य का अवसर नहीं दिया जा रहा है।
उनके अनुसार, जब विभाग में विद्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक है तो शिक्षण कार्य की आवश्यकता भी स्पष्ट है। ऐसे में वर्षों तक सेवाएं देने वाले गेस्ट टीचर को दोबारा अवसर नहीं दिया जाना समझ से परे है।
उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से सवाल किया कि आखिर किस आधार पर उन्हें बाहर रखा गया है और किन परिस्थितियों में अन्य लोगों को अध्यापन का अवसर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि विभाग में शिक्षण कार्य की आवश्यकता है तो अनुभवी शिक्षकों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कॉलेज प्रबंधन पर ‘चुनो और रखो’ की नीति अपनाने का आरोप
डॉ. शिवानंदन पयासी ने महाविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कॉलेज में नियुक्तियों और गेस्ट टीचर के चयन को लेकर कथित तौर पर ‘चुनो और रखो’ की नीति अपनाई जा रही है।
उनका आरोप है कि कुछ लोगों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार अवसर दिया जा रहा है, जबकि पहले से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षकों के चयन और नियुक्ति में स्पष्ट नियमों का पालन होना चाहिए।
डॉ. पयासी का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नियुक्ति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। यदि किसी शिक्षक को सेवा से हटाया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और उचित प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
विरोध में कराया मुंडन कॉलेज के मुख्य द्वार पर शुरू किया धरना
अपनी मांगों को लेकर डॉ. शिवानंदन पयासी ने बुधवार को विरोध का कड़ा तरीका अपनाया। उन्होंने अपना मुंडन कराया और इसके बाद टीआरएस कॉलेज के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए।
मुंडन कराकर विरोध जताने का उनका फैसला इस बात का संकेत है कि वे अपने साथ हुए कथित अन्याय को लेकर कितने नाराज हैं। कॉलेज गेट पर धरना शुरू करने के बाद उन्होंने अपनी मांगों को दोहराया और कहा कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल उनकी व्यक्तिगत नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने का भी सवाल है। यदि किसी शिक्षक के साथ गलत तरीके से व्यवहार किया जाता है तो उसकी शिकायत सुनने और उचित जांच करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने पर बैठे डॉ. शिवानंदन पयासी ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2018 से महाविद्यालय में अपनी सेवाएं दी हैं और अब उन्हें जिस तरीके से बाहर किया गया है, वह उनके लिए अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित रूप से गलत दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।
डॉ. पयासी ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने आरोपों को बताया निराधार
इस पूरे मामले में टीआरएस कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने डॉ. शिवानंदन पयासी की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
प्रभारी प्राचार्य ने आरोपों को खारिज करते हुए कॉलेज प्रबंधन पर लगाए गए सवालों को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, डॉ. पयासी की ओर से उठाए गए दस्तावेजों और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विस्तृत तथ्यात्मक स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर सामने आया है। एक तरफ पूर्व गेस्ट टीचर अपने साथ अन्याय होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन उनके आरोपों को गलत बता रहा है।
उच्च शिक्षा व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
TRS कॉलेज में सामने आया यह मामला केवल एक गेस्ट टीचर के विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसने महाविद्यालयों में जनभागीदारी के माध्यम से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा निरंतरता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
अतिथि शिक्षकों की भूमिका उच्च शिक्षा संस्थानों में महत्वपूर्ण होती है। कई बार नियमित शिक्षकों की कमी के बीच इन्हीं के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई संचालित होती है। ऐसे में वर्षों तक सेवाएं देने वाले शिक्षकों की नियुक्ति और कार्य से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
यदि किसी शिक्षक को दोबारा अवसर नहीं दिया जाता है तो उसके पीछे लागू नियमों और चयन प्रक्रिया का स्पष्ट होना आवश्यक है। वहीं शिक्षकों को भी अपनी नियुक्ति और सेवा से संबंधित निर्णयों के संबंध में उचित जानकारी मिलनी चाहिए।
अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
डॉ. शिवानंदन पयासी के विरोध प्रदर्शन के बाद अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि कॉलेज प्रबंधन और संबंधित उच्च शिक्षा अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी? क्या अध्यापन कार्य से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा होगी? और क्या सेवा से हटाए जाने के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।











