चित्रकूट / सतना: मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद धार्मिक नगरी चित्रकूट के घाटों पर जमी सिल्ट, कीचड़ और बालू को साफ करने के लिए पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इसी क्रम में भरत घाट पर स्वच्छता अभियान के दौरान जनभागीदारी और प्रशासनिक संवेदनशीलता की अनूठी तस्वीर सामने आई। घाट की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला पंचायत सदस्य संजय सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह स्वयं मैदान में उतरे। जिला पंचायत सदस्य ने हाथों में फावड़ा थामकर जमी सिल्ट हटाई, वहीं जिला पंचायत सीईओ ने तगाड़ी उठाकर मलबे को बाहर फेंकने में सहयोग किया।

श्रमदान, स्वच्छता अभियान और जनसंदेश
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जनप्रतिनिधि और अफसर का श्रमदान: भरत घाट की सफाई के दौरान जब जनप्रतिनिधि संजय सिंह और अधिकारी शैलेंद्र सिंह स्वयं फावड़ा व तगाड़ी लेकर श्रमदान करने लगे, तो वहां मौजूद श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया।
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सिल्ट और मलबे की सफाई: बाढ़ के उतरने के बाद भरत घाट पर भारी मात्रा में जमा हुई सिल्ट और बालू को हटाकर घाट को पुनः स्वच्छ व सुरक्षित बनाया जा रहा है।
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सामूहिक सहभागिता का संदेश: इस अभियान के जरिए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने आम जनता को सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों की स्वच्छता एवं संरक्षण में सामूहिक रूप से भागीदारी निभाने का संदेश दिया।

स्वच्छता अभियान का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | भरत घाट, चित्रकूट (जिला सतना) |
| प्रमुख श्रमदानकर्ता | संजय सिंह (जिला पंचायत सदस्य) एवं शैलेंद्र सिंह (सीईओ, जिला पंचायत) |
| अभियान का उद्देश्य | बाढ़ के बाद घाट पर जमा सिल्ट व बालू की सफाई |
| प्रभाव | सार्वजनिक स्वच्छता और जनभागीदारी का संदेश |
सफाई एवं पुनर्वास कार्य जारी
चित्रकूट के अन्य घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर भी प्रशासनिक टीमों, मशीनों और स्वयंसेवकों की मदद से सफाई कार्य लगातार संचालित किया जा रहा है, ताकि तीर्थ नगरी का माहौल जल्द से जल्द पूर्ववत और स्वच्छ बनाया जा सके।










