मऊगंज नया जिला बनते ही प्रजापति समाज के सामने खड़ा हुआ प्रशासनिक संकट, डिजिटल पोर्टल से नाम गायब होने का आरोप; पिछले ३ वर्षों में ३५ बार पत्राचार के बाद भी नहीं बने जाति प्रमाण पत्र, छात्रों का भविष्य अधर में


मऊगंज: मध्य प्रदेश के रीवा जिले से पृथक होकर वर्ष 2023 में नए अस्तित्व में आए मऊगंज (Mauganj) जिले में एक बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी खामी का मामला उजागर हुआ है। अंचल के प्रजापति-कुम्हार समाज का आरोप है कि नए जिला गठन के बाद से ही डिजिटल पोर्टल पर एक तकनीकी त्रुटि के कारण अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की सूची से उनका नाम विलोपित हो गया है। इसके चलते पिछले लगभग तीन सालों से समाज के हजारों पात्र परिवारों के जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। इस गंभीर विलेख को लेकर भड़के युवाओं और समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था में तत्काल विधिक सुधार की मांग की है।


रीवा जिले में मिल रहा है विधिक लाभ, मऊगंज में कड़ियाँ टूटीं; एक ही परिवार के साथ दो तरह का व्यवहार

अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ द्वारा कलेक्ट्रेट विंग को सौंपे गए विलेखों के आधार पर मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • अनुसूची क्रमांक ३५ से नाम गायब: समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, पूर्व में रीवा जिले का हिस्सा रहने के दौरान उन्हें अनुसूची क्रमांक 35 के तहत विधिक रूप से अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र निर्गत किए जाते थे। आज भी रीवा जिले की भौगोलिक सीमा में रह रहे परिवारों को आरक्षण, छात्रवृत्ति और पीएम आवास जैसी योजनाओं का विधिक लाभ मिल रहा है, लेकिन मऊगंज जिला बनते ही नए डिजिटल पोर्टल की फीडिंग से यह नाम गायब हो गया।
  • अजीबो-गरीब प्रशासनिक विलेख: स्थिति यह है कि एक ही मूल परिवार के सदस्य यदि रीवा में रह रहे हैं तो उनका विधिक प्रमाण पत्र आसानी से बन रहा है, जबकि मऊगंज की सीमा में रहने वाले सगे संबंधियों को भटकना पड़ रहा है।

NEET, JEE और व्यापमं परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं युवा; ३ साल में ३५ बार खटखटाया प्रशासनिक दरवाजा

जाति प्रमाण पत्र न बनने से अंचल के मेधावी छात्र-छात्राओं के भविष्य पर मंडरा रहे खतरों की कड़ियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. करियर पर लगा ब्रेक: स्कूल स्तर पर तो बच्चों को जैसे-तैसे दाखिला मिल गया है, लेकिन उच्च शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET, JEE, और एमपी व्यापमं (ESB) के विधिक आवेदनों में आरक्षित वर्ग का लाभ लेने के लिए डिजिटल प्रमाण पत्र अनिवार्य है। इसके अभाव में युवा सामान्य वर्ग में फॉर्म भरने को विवश हैं या परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं।
  2. कलेक्टर संजय कुमार जैन को सौंपा ज्ञापन: बुधवार को महासंघ के जिला अध्यक्ष राममिलन प्रजापति के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में समाज के नागरिक मऊगंज कलेक्ट्रेट पहुंचे। पदाधिकारियों ने दावा किया कि वे पिछले तीन सालों में अलग-अलग स्तर पर शासन को 35 बार लिखित विलेख भेज चुके हैं, परंतु आज तक इस तकनीकी विसंगति का विधिक निराकरण नहीं किया जा सका है।

प्रजापति कुम्भकार महासंघ की दो प्रमुख विधिक मांगें

  • पोर्टल में तत्काल सुधार: डिजिटल एनआईसी (NIC) पोर्टल में आवश्यक तकनीकी संशोधन कर अनुसूची क्रमांक 35 पर प्रजापति-कुम्हार समाज की प्रविष्टि को मऊगंज जिले के लिए भी विधिक रूप से बहाल किया जाए।
  • अस्थायी प्रमाण पत्र की व्यवस्था: जब तक दिल्ली और भोपाल स्तर से पोर्टल में स्थायी सुधार नहीं होता, तब तक छात्रों के विधिक शैक्षणिक हित में उन्हें वैकल्पिक रूप से ‘अस्थायी जाति प्रमाण पत्र’ (Provisional Caste Certificate) जारी करने का प्रशासनिक आदेश दिया जाए।

कलेक्टर ने दिया आश्वासन, आंदोलन की चेतावनी —
“प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कलेक्टर संजय कुमार जैन ने अब तक शासन स्तर पर की गई विधिक पत्राचार की कड़ियों से समाज को अवगत कराया और भरोसा दिया कि वे व्यक्तिगत रुचि लेकर इस तकनीकी त्रुटि को दूर कराने का विधिक प्रयास करेंगे.
दूसरी ओर, महासंघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते डिजिटल विलेख में सुधार कर पात्र छात्रों के प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो संपूर्ण विंध्य अंचल में एक बड़ा सामाजिक और विधिक आंदोलन छेड़ा जाएगा।”


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