सतना : सतना जिला अस्पताल के गायनी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां भर्ती 22 वर्षीय गर्भवती महिला के गर्भ में बच्चे की मौत होने के बावजूद तीन दिन बीत जाने पर भी प्रसव (डिलेवरी) नहीं कराया गया है। पीड़िता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में हीलाहवाली करने का आरोप लगाते हुए भारी नाराजगी जताई है। महिला दर्द और परेशानी से जूझ रही है, जिससे उसके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है।

जैतवारा से जिला अस्पताल रेफर हुई थी प्रसूता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुटहा निवासी अंशू कोल (22) पति सरमन कोल को बीते 20 सितंबर को प्रसव पीड़ा होने पर जैतवारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने गर्भस्थ शिशु की धड़कन कम होने की बात कहते हुए महिला को तत्काल सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उसी रात करीब 11:30 बजे महिला को जिला अस्पताल के गायनी वार्ड में भर्ती कराया। अगले दिन जांच के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को सूचित किया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है।
परिजनों का आरोप- गुहार के बाद भी नहीं दिया ध्यान
पीड़ित परिवार का कहना है कि बच्चे की मौत की पुष्टि होने के बाद से ही वे महिला का प्रसव या ऑपरेशन कराने की लगातार मांग कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि तीन दिन का समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे महिला की हालत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से मामले की जांच और तुरंत इलाज की मांग की है।
डॉक्टरों की सफाई: सामान्य प्रसव का किया जा रहा प्रयास
मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि चूंकि यह महिला की पहली डिलीवरी है, इसलिए डॉक्टर सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू सिंह ने जानकारी दी कि महिला लगातार डॉक्टरों की निगरानी में है। गर्भ में बच्चे की मृत्यु के बाद कई बार सामान्य प्रसव होने में समय लगता है। दवाएं देकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, और यदि सामान्य प्रसव नहीं होता है तो स्थिति के अनुसार सिजेरियन (ऑपरेशन) किया जाएगा।










