सीधी: मध्य प्रदेश का विंध्य अंचल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों और अनूठी आध्यात्मिक कड़ियों के लिए देश भर में विख्यात है। इसी कड़ी में सीधी (Sidhi) जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक गोपाल दास मंदिर अपनी अलौकिक परंपराओं के कारण इन दिनों देश के श्रद्धालुओं के लिए परम आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस विख्यात मंदिर परिसर में पूज्य गोपाल दास महाराज द्वारा शुरू कराया गया ‘सीताराम’ नाम का अखंड कीर्तन लगातार 108 वर्षों तक अनवरत जारी रखने का एक महासंकल्प लिया गया है। वर्तमान में कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, साधु-संतों की मंडलियां पालियों (Shifts) में मुस्तैद रहकर दिन-रात इस विधिक संकल्प को आगे बढ़ा रही हैं।

दीवारों पर लिखी रामायण की चौपाइयां; बेसहारा और वैरागियों का आशियाना बना मंदिर
सीधी के इस आध्यात्मिक केंद्र से जुड़ी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- दीवारों पर जीवंत हुई रामायण: इस भव्य मंदिर की सबसे बड़ी भौगोलिक और धार्मिक विशेषता यह है कि इसके विशाल परिसर की दीवारों पर संपूर्ण श्रीरामचरितमानस (रामायण) को विलेख रूप में खूबसूरती से उकेरा गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ-साथ दीवारों पर अंकित रामायण के पावन प्रसंगों और चौपाइयों का विधिक अध्ययन भी कर सकते हैं।
- भक्ति के साथ सामाजिक सुरक्षा की कड़ियाँ: गोपाल दास मंदिर केवल पूजा-पाठ का केंद्र नहीं है, बल्कि यह उन वृद्धों और लाचार नागरिकों के लिए एक बड़ा विधिक सहारा भी है, जिन्हें समाज या परिवार का साथ नहीं मिला। माता-पिता के अवसान के बाद कई युवा और बुजुर्ग इस मंदिर विंग को ही अपना घर मानकर वैराग्य और लोक-कल्याण के मार्ग पर मुस्तैद हैं।
साधु-संतों की अटूट मुस्तैदी; मानव कल्याण के लिए राम नाम ही आधार
अंचल की इस सांस्कृतिक धरोहर के तार्किक विलेख नीचे दिए गए हैं:
- 24 घंटे गूंजती है दिव्य ध्वनि: मंदिर परिसर का वातावरण बेहद शांत और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत रहता है। नियमित भजन-कीर्तन, शंखनाद और अखंड नाम-स्मरण की कड़ियों के कारण यहां आने वाले कलेक्ट्रेट और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर आम राहगीरों तक को एक परम शांति की विधिक अनुभूति होती है।
- सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के अनुसार, गोपाल दास मंदिर वर्षों से सीधी जिले की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का मुख्य विलेख रहा है। 108 साल के इस ऐतिहासिक महामंत्र जाप की कड़ियों को जानने और विंध्य की इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से शोधकर्ता और श्रद्धालु यहां मुस्तैद रहते हैं।
अखंड जाप एवं मंदिर का विधिक व सांख्यिकीय ढांचा (Statistical Matrix)
- अखंड जाप का महासंकल्प: 108 वर्ष (अनवरत 24 \times 7 विधिक कीर्तन)।
- मुख्य विलेख विशेषता: संपूर्ण रामायण महाकाव्य का दीवारों पर अंकन।
- भौगोलिक कड़ियाँ: जिला सीधी, विंध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश)।
- संचालन विंग: स्थानीय साधु-संत मंडल एवं ट्रस्ट।







