इंदौर: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) के पश्चिमी अंचल के लाखों नागरिकों के लिए बुधवार का दिन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार रोड पर 83 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित 300 बिस्तरीय आधुनिक जिला चिकित्सालय का विधिक लोकार्पण किया। साल 1988 से दुग्ध संघ की एक जर्जर इमारत में संचालित हो रहे जिला अस्पताल को करीब 38 साल बाद अपना सर्वसुविधायुक्त चार मंजिला नया भवन मिल गया है। इस दौरान सीएम ने अस्पताल की कड़ियों को जनता को सौंपने के साथ ही समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर एक बड़ा और नीतिगत बयान भी दिया।

पहले चरण में शुरू होगी ३४ बेड की मैटरनिटी विंग; १६६ डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की मुस्तैद तैनाती
इंदौर जिला अस्पताल के इस नए भवन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़ी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- चरणबद्ध तरीके से होगा संचालन: अस्पताल भवन पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन फिलहाल शुरुआती चरण में केवल 34 बिस्तरों वाली प्रसूति (मैटरनिटी) विंग को ही क्रियाशील किया जा रहा है। मेडिसिन, जनरल सर्जरी, हड्डी रोग (आर्थोपेडिक) और हृदय रोग (कार्डियोलॉजी) जैसे प्रमुख विभाग अगले चरणों में शुरू किए जाएंगे, तब तक गंभीर मरीजों को पूर्व की भांति एमवाय (MY) अस्पताल की कड़ियों पर निर्भर रहना होगा।
- बजट में पांच गुना से अधिक की बढ़ोतरी: इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक विलेख साल 2005 में भेजा गया था और 2017 में निर्माण शुरू हुआ था। देरी और संशोधित स्वीकृतियों के चलते जो अस्पताल कभी 18 करोड़ रुपये में बनना तय हुआ था, उसकी अंतिम निर्माण लागत बढ़कर 83.16 करोड़ रुपये पहुंच गई।
पश्चिमी इंदौर के दो दर्जन गांवों को त्वरित राहत; वीआईपी ड्यूटी से नियमित सेवाएं प्रभावित होने की आशंका
अस्पताल के लोकार्पण के जमीनी असर और प्रशासनिक मुस्तैदी की कड़ियाँ नीचे दी गई हैं:
- इन क्षेत्रों के गरीबों को मिलेगा सीधा लाभ: धार रोड पर इस हाईटेक अस्पताल के शुरू होने से चंदन नगर, नूरानी नगर, द्वारकापुरी, सिरपुर, राजेंद्र नगर सहित पश्चिमी इंदौर की घनी आबादी और आसपास के दो दर्जन से अधिक ग्रामीण अंचलों के कमजोर वर्ग को स्थानीय स्तर पर ही मुकम्मल इलाज मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सुचारू संचालन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग अफसरों और लैब तकनीशियनों सहित 166 पदों पर विधिक तैनाती कर दी है।
- लोकार्पण में जुटी रही आशा और एएनएम विंग: सीएमएचओ (CMHO) डॉ. माधव हसानी द्वारा जिले के सभी जोनल स्वास्थ्य कर्मचारियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को अनिवार्य रूप से कार्यक्रम में उपस्थित रहने के विधिक निर्देश दिए गए थे। इसके चलते बुधवार को अंचल के अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रूटीन टीकाकरण और ओपीडी सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर मुख्यमंत्री का बड़ा वैधानिक बयान
लोकार्पण समारोह के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर सरकार की मुस्तैदी जगजाहिर की:
एक देश, एक विधान और सामाजिक समरसता की कड़ियाँ —
“मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में एक समान कानून लागू करने की दिशा में पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है. अगर रामचंद्र एक शादी करते हैं, तो रहीम से भी विधिक रूप से एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है. मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं और उनके विधिक हितों की रक्षा के लिए विवाह व सामाजिक विषयों पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना नितांत आवश्यक है।”
सीएम ने स्पष्ट किया कि कानून को थोपने के बजाय इसके विधिक विलेख तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने प्रदेश के सभी 55 जिलों और 10 संभागों का सघन दौरा कर हर वर्ग से सुझाव एकत्र किए हैं, जिसके अध्ययन के बाद जल्द ही राज्य विधानसभा में इसका विधिक विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा।







