सिंगरौली के नवानगर में शराब दुकान पर खुलेआम ओवररेटिंग, MRP से 40-50 रुपये अधिक वसूलने का आरोप: बिना रेट लिस्ट मनमाने दामों पर बेची जा रही शराब; लाइसेंसी विमल सिंह की दुकान पर आबकारी विंग की चुप्पी से फूटा गुस्सा


सिंगरौली/नवानगर: मध्य प्रदेश के ऊर्जांचल सिंगरौली (Singrauli) जिले से आबकारी विभाग की लचर निगरानी व्यवस्था और उपभोक्ताओं की जेब पर खुलेआम डाका डालने का एक गंभीर मामला सामने आया है। नवानगर क्रमांक-1 स्थित देसी-विदेशी कंपोजिट शराब दुकान पर सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने और परिसर में रेट लिस्ट (मूल्य सूची) प्रदर्शित नहीं करने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का दावा है कि दुकान संचालक द्वारा विभिन्न ब्रांड्स की शराब पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से 40 से 50 रुपये अधिक की विधिक रूप से अवैध वसूली की जा रही है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश है।


लाइसेंसी विमल सिंह के नाम पर है दुकान; विरोध करने पर ग्राहकों से अभद्रता

नवानगर की इस शराब दुकान में चल रही मनमानी की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • लाइसेंस की आड़ में खेल: आधिकारिक विलेखों के अनुसार, उक्त देसी-विदेशी कंपोजिट शराब दुकान का संचालन लाइसेंसी विमल सिंह के नाम पर पंजीकृत है। नियमों के मुताबिक, हर मदिरा दुकान के मुख्य पटल पर शासन द्वारा स्वीकृत रेट लिस्ट टांगना अनिवार्य है, लेकिन इस विधिक नियम को ताक पर रखकर दुकान से मूल्य सूची को पूरी तरह गायब कर दिया गया है ताकि ग्राहकों को सही कीमत का पता न चल सके।
  • अवैध वसूली का सिंडिकेट: स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब भी कोई उपभोक्ता MRP देखकर प्रिंट रेट पर शराब देने का आग्रह करता है, तो सेल्समैन द्वारा प्रति बोतल 40 से 50 रुपये अतिरिक्त विधिक अधिशुल्क की मांग की जाती है। विरोध करने पर ग्राहकों की शिकायतों को सीधे खारिज कर दिया जाता है और उनके साथ अभद्र कड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है।

आबकारी विभाग की मुस्तैदी पर उठे सवाल; कलेक्ट्रेट तक विधिक शिकायत भेजने की तैयारी

नशे के इस अवैध कारोबार और ओवररेटिंग के खेल को लेकर स्थानीय नागरिकों की कड़ियाँ अब उग्र हो रही हैं:

  1. शिकायतों पर नहीं हुआ एक्शन: कई जागरूक उपभोक्ताओं का दावा है कि इस ओवररेटिंग और मूल्य सूची न होने की प्राथमिक सूचना आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कंट्रोल रूम विंग तक पहुंचाई गई थी। लेकिन लंबे समय के बाद भी धरातल पर न तो कोई औचक निरीक्षण हुआ और न ही जांच की कोई विधिक कड़ियाँ जोड़ी गईं, जिससे विभाग की मिलीभगत की बू आ रही है।
  2. औचक निरीक्षण की मांग: क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला आबकारी कंट्रोल रूम और सिंगरौली कलेक्ट्रेट से मांग की है कि नवानगर शराब दुकान पर तुरंत उड़नदस्ते (फ्लाइंग स्क्वाड) की विधिक दबिश दी जाए। स्टॉक रजिस्टर और पीओएस (POS) मशीनों के विलेखों की जांच कर ग्राहकों से वसूले गए अतिरिक्त पैसों का विधिक मिलान किया जाए।

नियमों के उल्लंघन पर निरस्त हो सकता है दुकान का विधिक लाइसेंस

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —
“मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम के विधिक प्रावधानों के तहत, यदि कोई भी मदिरा दुकान संचालक तय एमआरपी से एक रुपया भी अधिक वसूलता है या रेट लिस्ट छुपाता है, तो यह विधिक शर्तों का घोर उल्लंघन माना जाता है.
आबकारी विंग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि एक विशेष जांच दल का गठन कर नवानगर क्रमांक-1 की दुकान पर विधिक दबिश दी जाएगी। यदि ओवररेटिंग के विलेख और आरोप पंचनामे में सच पाए जाते हैं, तो लाइसेंसी विमल सिंह पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाने के साथ-साथ दुकान का विधिक लाइसेंस सस्पेंड करने की विधिक कार्रवाई की जा सकती है।”


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