मैहर : मैहर वन मंडल की अमरपाटन रेंज अंतर्गत आने वाली गोरसरी पहाड़ी में पिछले 17 दिनों से डेरा जमाए बैठा जंगली हाथी ‘ई-5 (सी-4)’ अब भी वन विभाग की पकड़ से बाहर है। बुधवार रात हाथी को सुरक्षित पकड़ने के लिए चलाए गए एक बड़े रेस्क्यू अभियान में बांधवगढ़ से आए 6 प्रशिक्षित कुमकी हाथियों और लगभग 150 वनकर्मियों की भारी टीम तैनात की गई थी। हालांकि, देर रात तक चली कड़ी मशक्कत के बावजूद शातिर हाथी टीम को चकमा देकर घने जंगलों में भाग निकला।

चार वन परिक्षेत्रों की संयुक्त टीम मुस्तैद, आला अधिकारी मौके पर
हाथी को काबू में करने के लिए मैहर वन मंडल के साथ अमरपाटन, मुकुंदपुर और बांधवगढ़ नेशनल पार्क की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला हुआ है। अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय, डिप्टी डायरेक्टर युहान कटारा, मैहर एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर और रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
गोरसरी पहाड़ी की घेराबंदी, तीन मुख्य मार्गों पर की गई बैरिकेडिंग
अभियान के दौरान 6 कुमकी हाथियों को आगे कर जंगली हाथी को चारों तरफ से घेरने का प्रयास किया गया, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर चकमा देता रहा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से वन विभाग और पुलिस बल ने गोरसरी, रामनगर और अमरपाटन मार्ग पर कड़ी बैरिकेडिंग कर दी है। हाथी के अचानक मुख्य मार्गों पर आने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों और राहगीरों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है।

बांधवगढ़ से बाणसागर डैम तैरकर पहुंचा था मैहर, ले चुका है एक की जान
वन अधिकारियों के अनुसार, यह हाथी 7-8 सितंबर की रात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकलकर भागा था। उसने बाणसागर डैम के करीब 5 किलोमीटर लंबे गहरे वाटर चैनल को तैरकर पार किया और अमरपाटन रेंज में प्रवेश कर गया। मैहर पहुंचने के बाद इस हाथी ने मौहारी गांव में एक ग्रामीण कंछेदी यादव पर हमला कर दिया था, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हिंसक घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल है और वन विभाग इसे ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की कोशिश में जुटा हुआ है।










