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सतना जिला अस्पताल में बिगड़े हालात: 10 बेड के PICU में 32 बच्चे भर्ती; 30 ऑक्सीजन पर, जमीन पर गद्दे बिछाकर इलाज को मजबूर

सतना जिला अस्पताल में बिगड़े हालात: 10 बेड के PICU में 32 बच्चे भर्ती; 30 ऑक्सीजन पर, जमीन पर गद्दे बिछाकर इलाज को मजबूर

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The Khabrilal

Published On: Sep 23, 2026, 3:21 PM IST

Updated On: Sep 23, 2026, 4:46 PM IST

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सतना : सतना जिले में मौसम में आ रहे लगातार उतार-चढ़ाव और बदलते तापमान का सबसे बुरा असर मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वायरल फीवर, ब्रोंकोलाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में अचानक भारी इजाफा होने से सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल का पीआईसीयू (PICU) और सामान्य शिशु वार्ड क्षमता से कई गुना अधिक मरीजों से भर गए हैं, जिसके कारण एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को रखना पड़ रहा है और कई मासूमों का इलाज जमीन पर बिछाए गए गद्दों व चादरों पर किया जा रहा है।
10 बेड के PICU में 32 मासूम, 30 बच्चे ऑक्सीजन सपोर्ट पर
अस्पताल से सामने आई तस्वीरें चिंताजनक हैं। महज 10 बेड की क्षमता वाले बच्चों के आईसीयू (PICU) में इस समय 32 अति गंभीर बच्चे भर्ती हैं। इनमें से 30 बच्चों की सांसें उखड़ने के कारण उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं दूसरी ओर, 20 बेड की क्षमता वाले सामान्य शिशु वार्ड में 47 बच्चे भर्ती हैं। यानी दोनों यूनिटों को मिलाकर कुल 79 मासूम बच्चों का इलाज चल रहा है, जो अस्पताल की निर्धारित क्षमता से लगभग तीन गुना अधिक है।
12 बच्चों में निमोनिया के गंभीर लक्षण
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि भर्ती बच्चों में से 12 मासूमों में निमोनिया के लक्षण मिले हैं। फेफड़ों में संक्रमण के कारण इन बच्चों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा जरूरत के अनुसार बच्चों को नेबुलाइज करने के साथ-साथ ऑक्सीजन और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान में और गिरावट आने पर सांस से जुड़े संक्रमण के मामलों में और तेजी आ सकती है।
अस्पताल में बेड की कमी, जमीन पर इलाज कराने को मजबूर परिजन
मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण वार्डों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। बेड कम पड़ने पर मजबूरीवश एक ही बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। जब बेड पूरी तरह भर गए तो अस्पताल प्रशासन ने जमीन पर गद्दे बिछाकर व्यवस्था बनाई, लेकिन गद्दे भी कम पड़ने पर जमीन पर महज बेडशीट (चादर) बिछाकर गंभीर बच्चों को लिटाया गया है।
डॉक्टरों की अभिभावकों को सलाह
शिशु रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम के इस बदलाव में बच्चों को ठंड और सर्द हवाओं से बचाकर रखें। यदि बच्चे में तेज बुखार, लगातार खांसी, पसलियां चलना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घर में इलाज करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।
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