अमरपाटन/मैहर : जिले में ‘उमंग दिवस’ के विशेष अवसर पर पुलिस प्रशासन ने बालिकाओं व छात्राओं को सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों तथा डिजिटल दुनिया के खतरों के प्रति सतर्क करने के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक (एसपी) अवधेश प्रताप सिंह के कुशल निर्देशन में थाना प्रभारी निरीक्षक सोनल सिंह परिहार एवं पुलिस अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र के विभिन्न शासकीय उच्च और माध्यमिक विद्यालयों में पहुंचकर बालिकाओं के साथ संवाद किया और उन्हें आत्मनिर्भर व जागरूक बनने का संदेश दिया।

गुड टच-बैड टच, पॉक्सो एक्ट और महिला सुरक्षा पर मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्कूली छात्राओं को ‘गुड टच’ (सुरक्षित स्पर्श) और ‘बैड टच’ (असुरक्षित या अनुचित स्पर्श) के बीच का अंतर बहुत ही सरल और सहज भाषा में समझाया। इसके साथ ही, बच्चों के संरक्षण के लिए बनाए गए कड़े कानून ‘पॉक्सो (POCSO) एक्ट’ और महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की असहज स्थिति, उत्पीड़न या असुरक्षा की भावना होने पर वे चुप न रहें। बिना किसी डर या झिझक के तुरंत अपने माता-पिता, जिम्मेदार शिक्षकों या निकटतम पुलिस स्टेशन में इसकी सूचना दें।
साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव के व्यावहारिक उपाय
आधुनिक दौर में बढ़ते इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीम ने साइबर सुरक्षा पर विशेष सत्र आयोजित किया। बालिकाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके, स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखने, अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट न स्वीकारने और निजी फोटो या जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई। इसके अलावा, ऑनलाइन वित्तीय ठगी, फर्जी लॉटरी कॉल और साइबर बुलिंग से बचाव के गुर भी सिखाए गए।
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों का वितरण और संवाद
आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए पुलिस ने प्रमुख हेल्पलाइन नंबर साझा किए और छात्राओं को इन्हें याद रखने की सलाह दी:
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साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930 (किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या साइबर अपराध की शिकायत के लिए)
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आपातकालीन पुलिस सहायता: 112 (किसी भी तात्कालिक संकट या दुर्घटना के समय)
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चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 (बच्चों से जुड़े अपराधों और बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए)
सत्र के अंतिम भाग में ‘प्रश्न-उत्तर’ चरण रखा गया, जहां बालिकाओं ने अपनी झिझक तोड़कर सुरक्षा व पुलिस प्रणाली से जुड़े कई सवाल पूछे। अधिकारियों ने उनके सभी प्रश्नों के संतोषजनक जवाब देकर उनका उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाया।










