इंदौर में कांग्रेस का महा-आक्रामक रुख: शोभा ओझा ने भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी पर सरकार से पूछे 7 तीखे सवाल; मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा, ‘वॉशिंग मशीन’ नीति पर उठाए विधिक सवाल

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य और केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विधिक व राजनैतिक चौतरफा हमला बोला है। शोभा ओझा ने प्रदेश में फैले कथित संस्थागत भ्रष्टाचार, नर्सिंग व व्यापम घोटालों, और अन्नदाताओं व बेरोजगार युवाओं की बदहाली का विधिक खाका खींचते हुए सीधे मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इन ज्वलंत विधिक कड़ियों को लेकर अब चुप नहीं बैठेगी और पूरे प्रदेश में संभागीय स्तर पर एक बड़ा जनांदोलन शुरू करने जा रही है।

व्यापम, नर्सिंग, महाकाल लोक और खजराना कागजी अस्पताल घोटालों पर विधिक घेराबंदी

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा ने सरकार की प्रशासनिक विफलताओं की निम्नलिखित कड़ियाँ उजागर कीं:

  • भ्रष्टाचार की ‘वॉशिंग मशीन’: शोभा ओझा ने बेहद तल्ख लहजे में आरोप लगाया कि प्रदेश में व्यापम घोटाला, पटवारी भर्ती परीक्षा, नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा, महाकाल लोक निर्माण विसंगतियां और हाल ही में इंदौर में उजागर हुआ ‘कागजी खजराना अस्पताल घोटाला’ जैसे बड़े मामले सामने आए, लेकिन विधिक रूप से किसी भी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कटाक्ष किया कि भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में जाते ही दागी चेहरों को क्लीन चिट थमा दी जाती है।
  • अन्नदाताओं पर विधिक अत्याचार: मंदसौर गोलीकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पीड़ित किसानों को आज तक वास्तविक न्याय नहीं मिल सका है। वर्तमान में भी किसान बिजली कटौती, खाद की भीषण महंगाई, स्लॉट बुकिंग की अव्यवहारिकता और कर्ज के बोझ तले दबे हैं। जब वे अपनी विधिक मांगों के लिए आवाज उठाते हैं, तो प्रशासन उनके खिलाफ दंडात्मक मुकदमे दर्ज कर देता है।

राम मंदिर चंदा घोटाले की निष्पक्ष जांच और विपक्ष के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

शोभा ओझा ने राष्ट्रीय और प्रादेशिक विधिक कड़ियों को जोड़ते हुए जांच एजेंसियों के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए:

  1. चंदा घोटाले पर चुप्पी क्यों?: कांग्रेस नेत्री ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी विलेख कड़ियों में सामने आए कथित चंदा घोटाले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े संगठनों पर उंगलियां उठने के बावजूद केंद्रीय विधिक एजेंसियां मौन साधे बैठी हैं।
  2. पक्षपातपूर्ण विधिक कार्रवाई: उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ जहां विपक्ष के नेताओं को बिना पुख्ता साक्ष्यों के विधिक जांच के जाल में फंसाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष के गंभीर वित्तीय घोटालों पर कोई प्रारंभिक जांच तक शुरू नहीं की जाती।

रीवा विधायक के बयान का किया विधिक समर्थन; छात्रों व युवाओं के न्याय के लिए सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस

रामनगर-मऊगंज से लेकर मालवा तक कांग्रेस की विधिक रणनीति —

“शोभा ओझा ने रीवा के भाजपा विधायक द्वारा अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गए हालिया विधिक बयानों का पुरजोर समर्थन किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य प्रदेश का युवा आज सरकारी नौकरियों की कमी और परीक्षाओं में हो रही जालसाजी के कारण मानसिक अवसाद व आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर है.

कांग्रेस ने सरकार के समक्ष 7 विधिक सवाल दागते हुए कहा है कि जब तक इन मुद्दों पर श्वेत पत्र जारी नहीं किया जाता और दोषियों पर सख्त विधिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस का छात्र संगठन (NSUI) और मुख्य विंग पूरे सूबे में कड़ा चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन जारी रखेगी।”

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