भोपाल/दिल्ली: देश में बाघों के संरक्षण और सुरक्षा दावों की पोल खोलती एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। साल 2026 के शुरुआती सवा चार महीनों में ही देश ने 70 से ज्यादा बाघों को खो दिया है। सबसे चौंकाने वाली और डराने वाली बात यह है कि इनमें से 42 प्रतिशत से अधिक (यानी 30 बाघ) अकेले मध्य प्रदेश में मरे हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि देश के ‘टाइगर स्टेट’ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में औसतन हर चौथे दिन एक बाघ दम तोड़ रहा है।

2026 में मध्य प्रदेश में महीनेवार बाघों की मौत का ग्राफ
साल की शुरुआत से ही राज्य में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनटीसीए (NTCA) के आंकड़ों के मुताबिक:
- जनवरी: 08 मौतें
- फरवरी: 03 मौतें
- मार्च: 03 मौतें
- अप्रैल: 12 मौतें (सबसे दर्दनाक महीना)
- मई: 04 मौतें (13 मई तक)
रिजर्व के अंदर और बाहर दोनों जगह मंडरा रहा है काल
आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में बाघों की मौत सिर्फ जंगलों के भीतर नहीं, बल्कि बाहरी इलाकों में भी हो रही है:
- इनसाइड (Inside): 30 में से 20 बाघों की मौत पूरी तरह सुरक्षित माने जाने वाले टाइगर रिजर्व के अंदर हुई है। हाल ही में 11 मई को बांधवगढ़ में मशहूर बाघ ‘D-1 पुजारी’ की मौत भी इसी का हिस्सा है।
- आउटसाइड (Outside): 10 बाघों की मौत (करीब 34%) टाइगर रिजर्व की सीमाओं से बाहर दर्ज की गई है।
आखिर क्यों खत्म हो रहे हैं देश के ‘शान’?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की लगातार हो रही इन मौतों के पीछे कई बड़े और गंभीर कारण हैं:
- मानव दखल और सिकुड़ते जंगल: जंगलों के आसपास लगातार बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण बाघों का प्राकृतिक आवास छिन रहा है।
- खत्म होते टाइगर कॉरिडोर: एक जंगल से दूसरे जंगल जाने वाले सुरक्षित रास्ते (कॉरिडोर) खत्म होने से बाघ मानव बस्तियों के करीब आ रहे हैं।
- आपसी संघर्ष (Territorial Fight): जगह की कमी के कारण बाघों के बीच वर्चस्व की खूनी जंग हो रही है।
- शिकार और करंट: लालची शिकारियों द्वारा बिछाए गए लोहे के फंदों और खेतों में छोड़े गए बिजली के अवैध करंट की वजह से कई बाघ बेमौत मर रहे हैं।
- सड़क और रेल हादसे: जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे और रेलवे ट्रैक भी बाघों के लिए मौत का जाल बन चुके हैं।
सिर्फ संख्या बढ़ाना काफी नहीं, सुरक्षा भी जरूरी: विशेषज्ञ
चीतों के कूनो प्रोजेक्ट (Kuno Project) को लेकर पहले से ही सवालों के घेरे में रही मध्य प्रदेश सरकार अब बाघों की इन रिकॉर्ड मौतों के बाद बैकफुट पर है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि “सिर्फ कागजों पर बाघों की संख्या बढ़ा लेने से ‘टाइगर स्टेट’ का तमगा सुरक्षित नहीं रहेगा। इसके लिए जंगलों के बीच सुरक्षित कॉरिडोर का निर्माण, बाघों के लिए पर्याप्त शिकार की व्यवस्था और वन विभाग की 24 घंटे मजबूत निगरानी प्रणाली बेहद जरूरी है।”
अगर समय रहते इन मौतों पर लगाम नहीं कसी गई, तो मध्य प्रदेश से ‘टाइगर स्टेट’ का गौरवशाली ताज छीनने में देर नहीं लगेगी।




