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मैहर में मनरेगा घोटाले की बू: 1 माह 20 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट गायब,गठित टीम पर उठे सवाल

मैहर में मनरेगा घोटाले की बू: 1 माह 20 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट गायब,गठित टीम पर उठे सवाल

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The Khabrilal

Published On: Apr 29, 2026, 2:48 PM IST

Updated On: Aug 2, 2026, 3:34 AM IST

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54 पंचायतों में ‘कागजों पर तालाब’, खेतों में खड़ी फसल; रिश्तेदारों को लाभ देने के आरोप, जिम्मेदारों की चुप्पी

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The Khabrilal News India : मैहर जिले में मनरेगा के तहत जल गंगा अभियान में स्वीकृत खेत तालाब निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में है। रामनगर जनपद सीईओ भारती दीक्षित द्वारा 9 मार्च 2026 को पत्र जारी कर तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी, जिसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 1 माह 20 दिन बीत जाने के बाद भी जांच टीम ने कोई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया, जिससे पूरे मामले में लीपापोती की आशंका गहराने लगी है।
गौरतलब है कि रामनगर ब्लॉक की 54 पंचायतों में बनाए गए खेत तालाबों की शिकायत सामने आई थी, जहां मौके पर तालाब गायब और उन्हीं स्थानों पर गेहूं की फसल खड़ी मिली। शिकायत के बाद गठित टीम में सहायक यंत्री भूपेंद्र सिंह, खंड पंचायत अधिकारी अशोक कुमार शर्मा और सहायक विकास विस्तार अधिकारी अनिल सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीईओ ने अपने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायतवार स्वीकृत राशि, व्यय, तकनीकी प्राक्कलन और कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही माप पुस्तिका, मस्टर रोल और अन्य अभिलेख भी जांच के दौरान उपलब्ध कराने को कहा गया था।
लेकिन आज तक न तो जांच पूरी हुई और न ही कोई दस्तावेज सामने आए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच टीम भी इस खेल में शामिल है या फिर जानबूझकर मामला दबाया जा रहा है?
इधर, ग्राम पंचायत खोडरी में भी गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यहां रोजगार सहायक राजेश पांडे पर अपनी ही माता को योजना का लाभ देने का आरोप है, जबकि सरपंच पर ससुर, चाचा ससुर सहित अन्य रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने की बात सामने आई है। सीईओ द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। खुद रोजगार सहायक ने अपने जवाब में यह स्वीकार किया कि कार्य नहीं हुआ, लेकिन सबसे अहम जानकारी अपनी माता को दिए गए लाभ को छुपा लिया।
पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और जांच में देरी अब भ्रष्टाचार की कहानी को और पुख्ता कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक कागजों में तालाब बनते रहेंगे और जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे रहेंगे?

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