मऊगंज: मऊगंज जिले में पर्यावरण संरक्षण और कृषि लागत कम करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर संजय कुमार जैन के निर्देशानुसार किसानों को रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग छोड़ जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

खेतों का निरीक्षण और जैविक विकल्पों पर ज़ोर
अभियान के दौरान सामने आई प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- खेतों एवं बीआरसी का निरीक्षण: अनुविभागीय कृषि अधिकारी (SDO) रवि सिंह बघेल ने प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के खेतों और बायो रिसोर्स सेंटर (BRC) का जायजा लिया।
- लागत में कमी व मिट्टी की सेहत: कृषि अधिकारियों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर घनामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, केंचुआ खाद और कंपोस्ट खाद के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादन लागत में भारी कमी आती है।
- 31 जुलाई तक फसल बीमा की अपील: निरीक्षण के दौरान किसानों और कृषि सखियों को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। कृषि सखियों को गांव-गांव जाकर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले का संक्षिप्त विवरण
- स्थान: मऊगंज जिला (मध्य प्रदेश)।
- मुख्य पहल: प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन एवं फसल बीमा जागरूकता अभियान।
- संबंधित अधिकारी: कलेक्टर संजय कुमार जैन, एसडीओ (कृषि) रवि सिंह बघेल।
- महत्वपूर्ण तिथि: 31 जुलाई 2026 (प्रधानमंत्री फसल बीमा की अंतिम तिथि)।







