
त्रिकाल पूजन, 11वीं सदी की दुर्लभ प्रतिमा और दर्शन व्यवस्था
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महानिर्वाणी अखाड़े ने किया प्रथम पूजन: 16 अगस्त की रात 11:30 बजे से पूजन प्रक्रिया प्रारंभ हुई। मध्यरात्रि 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने भगवान नागचंद्रेश्वर का महाअभिषेक व प्रथम पूजन किया, जिसके बाद पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
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त्रिकाल पूजा का विधान:
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प्रथम पूजा: 16 अगस्त मध्यरात्रि 12 बजे (अखाड़ा महंत द्वारा संपन्न)।
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द्वितीय पूजा: 17 अगस्त (नागपंचमी) दोपहर 12 बजे (अखाड़े द्वारा)।
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तृतीय पूजा: 17 अगस्त शाम की संध्या आरती के बाद (मंदिर समिति व पुजारियों द्वारा)।
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11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा: मंदिर में स्थापित प्रतिमा लगभग 1050 ईस्वी (11वीं सदी) की है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले सर्प के छत्र के नीचे विराजमान हैं। प्रतिमा में भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी।
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एक साथ नागचंद्रेश्वर दर्शन व महाकाल सवारी: 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार होने से भगवान महाकाल की भव्य पारंपरिक सवारी भी शाम को नगर भ्रमण पर निकलेगी। भक्तों को एक ही दिन नागचंद्रेश्वर दर्शन और महाकाल की सवारी का दुर्लभ पुण्य प्राप्त हो रहा है।
नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा
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प्रथम पूजा: 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे अखाड़े के महंत द्वारा।
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द्वितीय पूजा: 17 अगस्त दोपहर 12 बजे अखाड़े की ओर से।
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तृतीय पूजा: 17 अगस्त शाम को संध्या आरती के बाद मंदिर समिति व पुजारियों द्वारा।
प्रशासन ने तय किए अलग-अलग रूट (दर्शन व्यवस्था)
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नागचंद्रेश्वर सामान्य दर्शन: कर्कराज पार्किंग ➔ भील समाज धर्मशाला ➔ चारधाम ➔ हरसिद्धि चौराहा ➔ गेट नंबर-4 से प्रवेश।
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नागचंद्रेश्वर शीघ्र दर्शन: हरसिद्धि पाल ➔ बड़ा गणेश मार्ग ➔ गेट नंबर-5 से प्रवेश।
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महाकाल सामान्य दर्शन: त्रिवेणी संग्रहालय ➔ नंदी द्वार ➔ मानसरोवर ➔ गणेश व कार्तिक मंडप से प्रवेश।
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महाकाल शीघ्र दर्शन: नीलकंठ द्वार से सीधा प्रवेश।








