सतना जिला अस्पताल में चमत्कार: सर्पदंश के बाद १२ दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़े मासूम भाई-बहन; ५ दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ, डॉक्टरों ने केक काटकर दी विदाई

सतना: सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय सतना में एक भावुक और प्रेरणादायी नजारा देखने को मिला। रैगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करसरा निवासी दो मासूम चचेरे भाई-बहन—11 वर्षीय आंचल और 8 वर्षीय अनुराग—ने सर्पदंश (Snakebite) के बाद 12 दिनों तक मौत से जंग जीतकर नई जिंदगी हासिल की है। करीब 5 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ हुए बच्चों को अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम ने तालियों की गड़गड़ाहट और केक काटकर अस्पताल से सकुशल विदाई दी।


सोते समय डसा था जहरीला सांप; लंग्स हो चुके थे जाम

इस घटना और इलाज की सफलता से जुड़ी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • 12 घंटे बाद अस्पताल पहुंचे थे परिजन: वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि घर में सोते समय जहरीले सांप के डसने के लगभग 10 से 12 घंटे बाद परिजन बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। देरी के कारण दोनों बच्चों के फेफड़े (Lungs) पूरी तरह जाम हो चुके थे और उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी।
  • 5 दिन वेंटिलेटर पर संघर्ष: गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल टीम ने तत्काल बच्चों को आईसीयू (ICU) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के दिन-रात के समर्पित प्रयासों के कारण 5 दिन बाद उनकी स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ।
  • केक काटकर मनाया पुनर्जन्म का जश्न: 12 दिनों के गहन उपचार के बाद जब दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो गए, तो वार्ड में डॉक्टरों और परिजनों ने मिलकर केक काटा। डॉक्टरों ने इसे बच्चों का ‘पुनर्जन्म’ करार दिया।

अस्पताल प्रबंधन की अपील: झाड़-फूंक में समय न गंवाएं

इस सफलता के बाद जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने आम नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में अंधविश्वास, झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें। पीड़ित को तत्काल बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं, क्योंकि सही समय पर मिला डॉक्टरी इलाज ही जान बचा सकता है।


घटना एवं मेडिकल केस Snapshot Matrix

  • पीड़ित बच्चे: आंचल (11 वर्ष) एवं अनुराग (8 वर्ष)।
  • निवासी: ग्राम करसरा, रैगांव विधानसभा (जिला सतना, म.प्र.)।
  • उपचार स्थल: सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल, सतना।
  • नेतृत्वकर्ता डॉक्टर: डॉ. संदीप द्विवेदी एवं मेडिकल टीम।
  • इलाज की अवधि: कुल 12 दिन (जिसमें 5 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट शामिल)।
  • चिकित्सकीय संदेश: सर्पदंश पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें।

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