मैहर (नादन देहात): मैहर जिले के नादन देहात थाना क्षेत्र अंतर्गत करसरा गांव से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात घर में सो रहे एक 9 साल के मासूम बच्चे की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों द्वारा पहले झाड़-फूंक कराने और फिर अस्पताल ले जाने में हुई देरी के चलते बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। मृतक मासूम की पहचान विशाल कोल (9 वर्ष), पिता विनोद कोल, निवासी ग्राम करसरा के रूप में हुई है।

घटनाक्रम: झाड़-फूंक और अस्पताल पहुंचने में देरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशाल कोल सोमवार रात अपने घर में जमीन पर सो रहा था। इसी दौरान किसी जहरीले सांप ने उसे डस लिया। सांप के काटने का पता चलते ही परिजन घबरा गए और प्राथमिक चिकित्सीय सहायता के बजाय शुरुआत में बच्चे को झाड़-फूंक कराने ले गए।
जब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी, तब परिजन उसे आनन-फानन में मैहर के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही जहर फैलने के कारण बच्चे की मौत हो चुकी थी।
पुलिस कार्रवाई एवं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
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अस्पताल प्रबंधन ने दी सूचना: बच्चे की मौत के बाद सिविल अस्पताल प्रबंधन द्वारा घटना की जानकारी नादन देहात थाना पुलिस को दी गई।
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मर्ग कायम व पोस्टमार्टम: सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और वैधानिक कार्रवाई करते हुए मर्ग कायम किया। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराने के उपरांत अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया।
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गांव में शोक की लहर: इकलौते/मासूम बच्चे की असामयिक मौत की खबर से करसरा गांव में सन्नाटा पसर गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम व आयु | विशाल कोल (9 वर्ष) |
| पिता का नाम | विनोद कोल |
| घटनास्थल | ग्राम करसरा, थाना नादन देहात (मैहर) |
| अस्पताल | सिविल अस्पताल मैहर |
| प्रशासनिक कार्रवाई | नादन देहात पुलिस द्वारा मर्ग दर्ज, पोस्टमार्टम उपरांत शव सुपुर्द |
प्रशासन एवं डॉक्टरों की अपील
घटना के मद्देनजर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश (सांप के काटने) की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें। मरीज को बिना देरी किए तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं ताकि समय पर एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) इंजेक्शन देकर मरीज की जान बचाई जा सके।









