मैहर पुल धंसा होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। मैहर जिले के नादन थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बना बुढेरुआ-जरियारी मार्ग का पुल पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो गया।
बरगी नहर पर बने पुल का एक पिलर करीब 4 इंच नीचे बैठ गया। इसके बाद पुल की साइड वॉल में लंबी दरार दिखाई दी। पुल से जुड़ी सड़क भी करीब 4 इंच धंस गई।
स्थिति सामने आने के बाद पुल पर आवागमन रोक दिया गया है। इस कारण दो दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
4 इंच धंसा पिलर, सड़क और पुल के बीच बना गैप
बारिश के बाद पुल के पहले पिलर के नीचे की मिट्टी धंस गई। मिट्टी खिसकने से पिलर नीचे बैठ गया। इसके साथ ही साइड वॉल में दरार पड़ गई।
पुल और सड़क के बीच गहरा गैप भी दिखाई दे रहा है। इसलिए, यहां से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया था।
पिलर के आसपास की सपोर्टिंग मिट्टी भी कट गई। बड़ी मात्रा में मिट्टी बरगी नहर में जा गिरी। यह स्थिति पुल की मजबूती को लेकर सवाल खड़े करती है।
पहली ही बारिश में सामने आई निर्माण की खामी
करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल की हालत पहली ही बारिश में बिगड़ गई। हालांकि, पुल के निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता पर अंतिम फैसला तकनीकी जांच के बाद ही होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल से दर्जनों गांव जुड़े हैं। ऐसे में इसका बंद होना लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
वहीं, पहली ही बरसात में पिलर धंसने से निर्माण कार्य की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन और इंजीनियर मौके पर पहुंचे
पुल की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। मौके पर तहसीलदार और पुलिस अधिकारी पहुंचे।
पीडब्ल्यूडी तथा एनवीडीए के इंजीनियरों ने भी पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद, सुरक्षा को देखते हुए पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई।
फिलहाल पुल से आवागमन पूरी तरह बंद है। अधिकारियों ने तकनीकी जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।
दो दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क प्रभावित
पुल बंद होने का असर आसपास के कई गांवों पर पड़ा है। करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों को अब दूसरे रास्तों का उपयोग करना पड़ सकता है। इसके अलावा, दैनिक जरूरतों, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए भी लोगों को परेशानी हो सकती है।
लंबे समय तक पुल बंद रहने पर समस्या और बढ़ सकती है।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
मैहर पुल धंसा मामले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल पहली बारिश में कैसे क्षतिग्रस्त हुआ?
निर्माण के दौरान मिट्टी की जांच और तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। साथ ही, निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
हालांकि, किसी भी निर्माण संबंधी खामी की पुष्टि तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों के बयान से क्या सामने आया?
मौके पर पहुंचे महेन्द्र सिंह, CSP मैहर, ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी दी।
वहीं, एनवीडीए के इंजीनियर रोहित सिंह ने पुल की स्थिति का निरीक्षण किया। तकनीकी जांच के बाद ही नुकसान के कारण और मरम्मत की प्रक्रिया स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अब जिम्मेदारों से बड़ा सवाल
पहली ही बारिश में पुल का पिलर धंसने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि पुल निर्माण में सभी तकनीकी मानकों का पालन हुआ था, तो इतनी जल्दी यह स्थिति क्यों बनी?
अब, प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने पुल की सुरक्षा बहाल करना बड़ी चुनौती है। साथ ही, प्रभावित गांवों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था भी जरूरी है।
तकनीकी जांच के बाद ही यह साफ होगा कि मैहर पुल धंसा क्यों और इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है।
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