रामनगर (मैहर): देश जहां आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, वहीं मैहर जिले के रामनगर नगर परिषद अंतर्गत वार्ड क्रमांक-4 स्थित करौंदिया गांव के ग्रामीण आज भी बारिश के दिनों में बुनियादी आवागमन की सुविधा से वंचित हैं। मूसलाधार बारिश होते ही गांव के समीप बहने वाली नदी उफान पर आ जाती है, जिससे ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थाई लकड़ी का पुल पानी के तेज बहाव में बह जाता है। इसके चलते दो दर्जन से अधिक परिवारों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है और लोग अपने ही गांव में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं

तकनीकी स्वीकृति के बावजूद प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार
ग्रामीणों की समस्या और प्रशासनिक स्थिति से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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प्रशासनिक कागजों में अटका निर्माण: वर्ष 2023 में तत्कालीन कलेक्टर रानी बाटड के निर्देशों पर रामनगर एसडीएम, नगर परिषद व ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग ने संयुक्त निरीक्षण किया था। RES विभाग द्वारा सड़क निर्माण और स्लैब कलवर्ट (पुलिया) के लिए ₹236 लाख (2.36 करोड़ रुपये) का प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) भी जारी कर दी गई थी, लेकिन अभी तक प्रशासकीय स्वीकृति (Administrative Sanction) न मिलने से काम ठप पड़ा है।
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PM आवास योजना के लाभार्थी भी परेशान: नगर परिषद द्वारा गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान तो बना दिए गए हैं, लेकिन कनेक्टिविटी न होने से बारिश के दौरान खेती-किसानी, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ग्रामीणों का बाहर निकलना दूभर हो जाता है।
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नई कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी से आस: हर साल अस्थाई लकड़ी का पुल बह जाने से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द ₹236 लाख के प्रस्ताव को प्रशासकीय स्वीकृति दिलाकर पक्के निर्माण की मांग की है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें मैहर की नई कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी पर टिकी हैं।
मामले का संक्षिप्त विवरण
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स्थान: वार्ड क्रमांक-4 (करौंदिया गांव), नगर परिषद रामनगर, जिला मैहर (मध्य प्रदेश)।
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समस्या: नदी पर पक्का पुल न होने से बारिश में आवागमन ठप (गांव टापू में तब्दील)।
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प्रस्तावित बजट: ₹236 लाख (RES विभाग द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्राप्त)।
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मांग: प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर जल्द से जल्द पुल व सड़क निर्माण शुरू कराना।









