मैहर। मैहर जिले के रामनगर जनपद क्षेत्र में मनरेगा के तहत जल गंगा अभियान में स्वीकृत खेत तालाब निर्माण कार्य अब जांच और कार्रवाई के इंतजार में है। 54 ग्राम पंचायतों में खेत तालाबों के निर्माण को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई स्थानों पर रिकॉर्ड में तालाब निर्माण दिखाया गया, जबकि मौके पर तालाब नजर नहीं आए और संबंधित जमीन पर फसल खड़ी मिली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रामनगर जनपद पंचायत की सीईओ भारती दीक्षित ने 9 मार्च 2026 को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। टीम को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। जांच की जिम्मेदारी सहायक यंत्री भूपेंद्र सिंह, खंड पंचायत अधिकारी अशोक कुमार शर्मा और सहायक विकास विस्तार अधिकारी अनिल सिंह को सौंपी गई थी।
सीईओ के पत्र में ग्राम पंचायतवार स्वीकृत राशि, खर्च की गई राशि, तकनीकी प्राक्कलन और मौके पर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा माप पुस्तिका, मस्टर रोल और अन्य संबंधित अभिलेखों की भी जांच की जानी थी।
15 दिन की जांच, लेकिन बीत गया एक महीने से ज्यादा समय
निर्धारित समय सीमा के बावजूद जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के बाद जांच के आदेश तो जारी हुए, लेकिन जांच की प्रगति और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में शिकायतकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच रिपोर्ट कब सामने आएगी और यदि शिकायतों में तथ्य मिलते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।
खोडरी पंचायत में रिश्तेदारों को लाभ देने के आरोप
इसी मामले से जुड़ी ग्राम पंचायत खोडरी में भी योजना के लाभ को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में रोजगार सहायक राजेश पांडे पर अपनी माता को योजना का लाभ दिलाने का आरोप लगाया गया है। वहीं सरपंच पर ससुर, चाचा ससुर सहित अन्य रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में सीईओ की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। रोजगार सहायक ने अपने जवाब में कार्य नहीं होने की बात स्वीकार किए जाने का उल्लेख किया है, हालांकि शिकायत से जुड़े अन्य आरोपों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दस्तावेजों और मौके की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सवाल जांच की पारदर्शिता पर
एक ओर खेत तालाब जैसी जल संरक्षण योजनाओं पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर विषय है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 54 पंचायतों में खेत तालाबों से जुड़ी शिकायतों की जांच कब पूरी होगी? जांच टीम अपनी रिपोर्ट कब सौंपेगी? और यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अब निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी।










