मैहर : मैहर के शासकीय सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और प्रशासनिक घोर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल की चार मंजिला इमारत में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मेडिकल स्टाफ की सुगम आवाजाही के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट लंबे समय से सफेद हाथी साबित हो रही है। बार-बार मरम्मत (मेंटेनेंस) का दावा किए जाने के बावजूद लिफ्ट दो-चार दिन चलती है और फिर बंद हो जाती है। इसके चलते चार मंजिला अस्पताल परिसर में गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से सीढ़ियों के रास्ते ले जाने में परिजनों के पसीने छूट रहे हैं।

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं, कमीशनखोरी के लग रहे गंभीर आरोप
अस्पताल से जुड़े सूत्रों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, लिफ्ट के रख-रखाव और बार-बार की जाने वाली मरम्मत के नाम पर स्वास्थ्य विभाग अब तक लाखों रुपये का बजट फूंक चुका है। इसके बावजूद लिफ्ट के सुचारू रूप से न चलने के कारण मेंटेनेंस की आड़ में बड़ी वित्तीय अनियमितता और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब लिफ्ट पुरानी होकर बार-बार तकनीकी खराबी दे रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी बार-बार मरम्मत पर पैसा पानी की तरह बहाने के बजाय नई और उच्च गुणवत्ता की लिफ्ट लगाने का व्यावहारिक कदम क्यों नहीं उठा रहे हैं?
में एजेंसियां और अधिकारी कटघरे में; जांच और कार्रवाई की उठी मांग
मरीजों और उनके तीमारदारों ने मांग की है कि लिफ्ट के मेंटेनेंस पर अब तक खर्च हुई कुल राशि, संबंधित वेंडर एजेंसी के अनुबंध और उसकी कार्यप्रणाली की पारदर्शी तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही लिफ्ट को ठीक करने वाली संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि जिला स्वास्थ्य प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन इस गंभीर समस्या का कब तक स्थायी समाधान निकालता है या फिर मरम्मत के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहेगा।










