वादे हवाई, जनता प्यासी: उमरिया के माली गांव में पानी के लिए हाहाकार; 3 किमी का पथरीला घाट उतरकर कुएं से पानी लाने को मजबूर आदिवासी

उमरिया/आकाशकोट: मध्य प्रदेश में भले ही ‘हर घर जल’ और ‘नलजल योजना’ के जरिए विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन उमरिया जिले के आदिवासी बाहुल्य आकाशकोट क्षेत्र से आई एक तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। चिलचिलाती गर्मी और 45 डिग्री के टॉर्चर के बीच ग्राम पंचायत माली के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। गाँव में पानी का स्रोत न होने के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों को जान जोखिम में डालकर रोजाना 3 किलोमीटर दूर ऊंचे-नीचे, पथरीले और खतरनाक घाट के रास्तों को पार कर एक कुएं से पीने का पानी लाना पड़ रहा है।

तस्वीरें खींचकर चले जाते हैं अफसर, प्यास वैसी ही रहती है

  • तपती धूप में जल युद्ध: माली गांव के हर परिवार का प्रत्येक सदस्य इस समय काम-धंधा छोड़कर सिर्फ पानी के इंतजाम में जुटा हुआ है। चिलचिलाती धूप में ग्रामीण सिर पर बर्तन रखे पहाड़ों और घाटियों के दुर्गम रास्तों को नाप रहे हैं।
  • अधिकारियों पर फूटा गुस्सा: गांव की निवासी इन्द्राणा बाई ने प्रशासन के रवैये पर तीखा आक्रोश जताते हुए कहा— “जिला प्रशासन सिर्फ पानी देने का वादा करता है, लेकिन जमीन पर बूंद भर पानी नहीं है। चुनाव के समय और संकट बढ़ने पर अफसर आते हैं, हमारी तस्वीरें खींचते हैं और चले जाते हैं, लेकिन हमारी प्यास और मजबूरी कोई नहीं समझता।”

नलजल योजना ठप: गंदे तालाब का पानी पीने से मंडराया बीमारियों का खतरा

स्थानीय निवासी सुंदर सिंह और इमरती बाई ने बताया कि कागजों पर तो सरकार ने गांव में पानी की पाइपलाइन बिछाई है, लेकिन हकीकत में नलजल योजना महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी है।

दूषित पानी का सहारा: पीने के पानी के लिए कुएं पर निर्भरता के अलावा, दैनिक निस्तार (नहाने-धोने) के लिए ग्रामीणों को गांव से 3 किलोमीटर दूर स्थित एक पुराने तालाब पर जाना पड़ता है। इस तालाब का पानी बेहद गंदा और हरा हो चुका है। इस दूषित पानी के इस्तेमाल से अब पूरे आदिवासी गांव में गंभीर संक्रामक बीमारियों और महामारी के फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

मामला गरमाया तो कलेक्टर राखी सहाय ने लिया संज्ञान, एसडीएम को भेजा

इस संवेदनशील और गंभीर मामले की गूंज जब जिला मुख्यालय तक पहुंची, तो उमरिया जिला कलेक्टर राखी सहाय ने त्वरित कड़ा रुख अपनाया है:

  1. जमीनी जांच के आदेश: कलेक्टर ने तुरंत एसडीएम बांधवगढ़ और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम को तत्काल माली गांव पहुंचकर जमीनी हकीकत की तस्दीक करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।
  2. वैकल्पिक व्यवस्था का भरोसा: कलेक्टर राखी सहाय ने आश्वस्त किया है कि ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यदि वहां पेयजल संकट है, तो तात्कालिक राहत के तौर पर सोमवार से ही पानी के टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक सप्लाई शुरू कराई जाएगी।

अब देखना यह है कि प्रशासनिक अमले की इस कागजी फुर्ती के बाद प्यासे ग्रामीणों को इस जानलेवा घाट और दूषित पानी से कब तक हमेशा के लिए परमानेंट मुक्ति मिल पाती है।

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