मऊगंज: विंध्य अंचल के नए नवेले जिले मऊगंज की ग्राम पंचायत सीतापुर अंतर्गत आने वाले डूडा दुआरी गांव में पिछले 8 वर्षों से अधूरा पड़ा मुक्तिधाम का निर्माण स्थानीय ग्रामीणों के लिए भारी मुसीबत का सबब बना हुआ है। कई सालों तक पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो सोमवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने पूरे मामले में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, दोषी कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई और 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने की पुरजोर मांग की है।
बारिश में दूसरे गांव जाने को मजबूर; रास्ते में कीचड़ से शव ले जाना हुआ दुभर
ग्रामीणों की पीड़ा और ज्ञापन की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- खुले में अंतिम संस्कार की मजबूरी: ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में शासकीय श्मशान/मुक्तिधाम न होने के कारण किसी की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसी गांवों में जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में रास्ते में कीचड़ और पानी भर जाने से शव ले जाना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे कई बार मजबूरी में खुले स्थान पर ही अंतिम क्रिया करनी पड़ती है।
- स्वीकृत बजट के गबन का आरोप: ज्ञापन देने पहुंचे राकेश कुमार साकेत, आशीष साकेत, रामचरण और उमाशंकर साकेत समेत ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब मुक्तिधाम निर्माण के लिए सरकारी राशि स्वीकृत हो चुकी थी, तो काम अधूरा क्यों छूटा? ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच कर यह पता लगाया जाए कि स्वीकृत बजट का पैसा कहाँ खर्च हुआ।
प्रशासन को १५ दिन का अल्टीमेटम; कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेताया है कि पंचायत और जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही आज तक डूडा दुआरी गांव इस मूलभूत सुविधा से वंचित है। यदि अगले 15 दिनों के भीतर मुक्तिधाम का निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ नहीं कराया गया, तो ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना देने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।
समस्या एवं जन-मांग का सांख्यिकीय ढांचा (Issue Resolution Matrix)
- स्थान: डूडा दुआरी, ग्राम पंचायत सीतापुर (जिला मऊगंज, म.प्र.)।
- समस्या की अवधि: विगत 8 वर्षों से मुक्तिधाम निर्माण अधूरा।
- मुख्य प्रभावित वर्ग: डूडा दुआरी गांव के समस्त निवासी।
- ग्रामीणों का अल्टीमेटम: 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने की समय-सीमा।
- मुख्य मांगें: बजट की जांच, दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई व 15 दिन में काम शुरू करना।
- आंदोलन की चेतावनी: कलेक्ट्रेट के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना।







