MP में समय से पहले चुनाव की सुगबुगाहट: नगरीय निकाय चुनाव 2027 के लिए महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

भोपाल: मध्य प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों (Urban Body Elections 2027) को लेकर राज्य सरकार ने अपनी कमर कस ली है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मंत्रालय से एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सूबे के सभी नगर निगमों के महापौर और नगर पालिका व नगर परिषदों के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण (Reservation) की कार्रवाई तत्काल शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। शासन ने इस पूरी महाप्रक्रिया को समय सीमा में और पारदर्शी तरीके से निपटाने के लिए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, मध्य प्रदेश को ‘विहित प्राधिकारी’ (Authorized Authority) नियुक्त कर दिया है।

भास्कर हाइलाइट्स: 5 साल का कार्यकाल और समय से पहले कसरत

मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनावी चक्र को लेकर प्रशासनिक तैयारी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 2022 में हुए थे पिछले चुनाव: मध्य प्रदेश में इससे पहले व्यापक स्तर पर नगर निगमों और परिषदों के चुनाव जून-जुलाई 2022 में संपन्न हुए थे।
  • 2027 में होने हैं चुनाव: चूंकि देश में नगरीय निकायों का वैधानिक कार्यकाल 5 वर्ष का निर्धारित है, इसलिए नियमानुसार अगले आम चुनाव वर्ष 2027 के मध्य में होने तय हैं। वर्ष 2026 में ही शुरू हुई इस कसरत को समय पर चुनाव कराने की दिशा में सरकार का एक बड़ा और अग्रिम कदम माना जा रहा है।

1999 के नियमों के आधार पर तय होगा रोटेशन; महिलाओं को मिलेगा 50% का भारी कोटा

विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार, इस बार आरक्षण की पूरी कानूनी प्रक्रिया को बेहद बारीकी से परखा जाएगा:

  1. चक्रानुक्रम (रोटेशन) का फॉर्मूला: यह पूरी चुनावी प्रक्रिया ‘मध्य प्रदेश नगर पालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम 1999’ के कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत ही पूरी की जाएगी। इसमें नई जनगणना, जनसंख्या के अनुपात और रोटेशन के आधार पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सीटें तय होंगी।
  2. आधी आबादी को पूरा हक: भारत के कई राज्यों में पंचायती राज और स्थानीय निकायों में महिलाओं को न्यूनतम 33% आरक्षण प्राप्त है, लेकिन मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के मामले में अग्रणी रहा है। यहाँ निकायों में महिलाओं के लिए पूरे 50% सीटें आरक्षित हैं, यानी इस बार भी आधी सीटों पर महिला कप्तानों का राज होगा।

आरक्षण की अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद ही बजेगा चुनावी बिगुल

चुनावी प्रक्रिया का अगला कदम —

“प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, विहित प्राधिकारी द्वारा सभी जिलों से जनसंख्या और पुराने रोटेशन का डेटा मंगाया जा रहा है। इस आरक्षण प्रक्रिया के पूरी तरह मुकम्मल होने, दावों-आपत्तियों के निपटारे और अंतिम सूची के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) द्वारा सूबे में चुनाव की वास्तविक तारीखों और आचार संहिता का एलान किया जाएगा।”

इस आदेश के सामने आते ही विंध्य, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ के स्थानीय क्षत्रपों और दावेदारों ने अभी से अपने-अपने वार्डों और जातियों के समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। इस आरक्षण सूची से कई दिग्गजों के सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

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