भोपाल/बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते दिनों 30 से अधिक बैगा और गोंड आदिवासी बच्चों की दुखद मौत का मामला अब प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। घटना को लेकर जारी जनाक्रोश और विरोध-प्रदर्शनों के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया (X) पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम से एक फर्जी व तंज से भरा इस्तीफा पत्र (Fake Resignation Letter) साझा कर हलचल मचा दी है। अभिजीत दीपके को हाल ही में बालाघाट दौरे के दौरान स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने यह व्यंग्यात्मक कदम उठाते हुए राज्य सरकार की स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण व्यवस्थाओं पर तीखा प्रहार किया है।

असली जैसा दिखने वाला ‘फेक’ इस्तीफा: गवर्नर को किया संबोधित
अभिजीत दीपके द्वारा शेयर किए गए इस पत्र को बिल्कुल आधिकारिक रूप देने के लिए इसमें राज्य सरकार का प्रतीक चिह्न, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का पता और नकली हस्ताक्षर तक शामिल किए गए हैं। पत्र में राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित करते हुए लिखा गया है:
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इस्तीफे का तंज: “मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा देता हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे सेवा का मौका दिया, जिसमें मैं पूरी तरह नाकाम रहा हूं।”
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नैतिकता पर सवाल: पत्र में मौतों की जिम्मेदारी लेते हुए लिखा गया कि “बालाघाट में 30 से ज्यादा मासूम आदिवासी बच्चों की मौत के बाद मेरा ज़मीर मुझे इस कुर्सी पर बने रहने की इजाजत नहीं देता।”

मुआवजे और स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी पर घेरा
दीपके ने इस छद्म पत्र के जरिए राज्य सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे की राशि पर भी गंभीर सवाल उठाए:
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मुआवजे पर तंज: उन्होंने लिखा कि विरोध के बाद मुआवजा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया। अगर ये किसी मंत्री या विधायक के बच्चे होते, तो क्या यही रकम काफी मानी जाती?
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उच्च स्तरीय जवाबदेही: स्वास्थ्य विभाग और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की जगह सीधे शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय न होने पर भी सरकार की खिंचाई की गई।
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एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला: पत्र में एनसीआरबी (NCRB) और सरकारी आंकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों (ST) के खिलाफ अपराधों, कुपोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कथित बदहाली का जिक्र किया गया।
मामले का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| मूल घटना | बालाघाट जिले में 30 से अधिक बैगा-गोंड बच्चों की मौत का मामला |
| विवादित कदम | अभिजीत दीपके द्वारा सीएम मोहन यादव के नाम से ‘फेक इस्तीफा’ पोस्ट करना |
| मुख्य बिंदु | मुआवजे की राशि, स्वास्थ्य महकमे की नाकामी और आदिवासियों की अनदेखी पर तंज |
| प्रशासनिक स्थिति | बालाघाट स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार निगरानी में |
विंध्य और महाकोशल में गर्माया मुद्दा
बालाघाट में बच्चों की मौत और उसके बाद सोशल मीडिया पर छिड़े इस राजनीतिक युद्ध ने महाकोशल से लेकर विंध्य अंचल तक हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से बड़े प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई और स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं इस तरह के फर्जी पत्र पोस्ट किए जाने को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं।










