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उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ तैयारियों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र बना ‘खड़े हनुमान मंदिर’: 5 दिन की मशक्कत के बाद भी टस से मस नहीं हुई परमारकालीन प्रतिमा; संतों ने कहा- भगवान नहीं जाना चाहते

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ तैयारियों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र बना ‘खड़े हनुमान मंदिर’: 5 दिन की मशक्कत के बाद भी टस से मस नहीं हुई परमारकालीन प्रतिमा; संतों ने कहा- भगवान नहीं जाना चाहते

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The Khabrilal

Published On: Sep 9, 2026, 6:07 PM IST

Updated On: Sep 9, 2026, 8:56 PM IST

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उज्जैन: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण (कंठाल चौराहा से छत्री चौक) के तहत अति प्राचीन ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को हटाने की प्रशासनिक कवायद एक बड़े गतिरोध में बदल गई है। मंदिर का गर्भगृह और मुख्य ढांचा तोड़े जाने के बाद जब दुर्लभ प्रतिमा को विस्थापित करने का प्रयास किया गया, तो बीते 5 दिनों से लगातार प्रयासों के बावजूद मूर्ति अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। वर्तमान में प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित किया गया है। जहां एक ओर साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु इसे ‘ईश्वरीय चमत्कार’ मान रहे हैं, वहीं पुरातत्वविदों का कहना है कि यह परमारकालीन प्राचीन इंजीनियरिंग और विशिष्ट ‘लॉकिंग तकनीक’ का अद्भुत नमूना है।

परमार काल और राजा भोज के समय की प्राचीन शिल्पकला

विक्रम विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, खड़े हनुमान जी की यह प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर (Basalt Stone) से निर्मित है, जो परमार काल एवं राजा भोज के शासनकाल की दुर्लभ स्थापत्य कला को दर्शाती है।
  • प्राचीन लॉकिंग सिस्टम: डॉ. सोलंकी ने स्पष्ट किया कि उस दौर में आधुनिक सीमेंट या लोहे के बजाय पत्थरों में छेद कर आपस में फंसाने वाले ‘लॉकिंग सिस्टम’ के तहत ऐसी मूर्तियों और संरचनाओं को आधार से जोड़ा जाता था।
  • ASI से मदद की जरूरत: पुरातत्वविदों ने जिला प्रशासन को सलाह दी है कि मूर्ति को बिना किसी क्षति के सुरक्षित विस्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों की मदद ली जाए।

प्रशासन का प्लान, विरोध और वर्तमान स्थिति

  • विस्थापन का प्रस्ताव: नगर निगम व जिला प्रशासन इस प्रतिमा को सुरक्षित रूप से ‘टंकी चौक’ पर पुनर्स्थापित करना चाहता है। इसके लिए प्रतिमा के बेस के पास 1.5 फीट गहरा गड्ढा भी खोदा गया है।
  • स्कैनिंग के बाद बनेगी नई रणनीति: लगातार असफलता के बाद अब प्रशासन ने बिना किसी जल्दबाजी के अत्याधुनिक मशीनों और आर्कियोलॉजिस्ट की मदद से प्रतिमा के आधार की 3D स्कैनिंग कराने का निर्णय लिया है।
  • संतों व हिंदूवादी संगठनों की चेतावनी: स्थानीय नागरिकों और संतों का कहना है कि भगवान इसी स्थान पर रहना चाहते हैं। श्रद्धालुओं ने चेतावनी भरे पोस्टर लगाकर मांग की है कि सड़क चौड़ीकरण के नक्शे में बदलाव कर मंदिर को इसी स्थान पर भव्य रूप से पुनर्विकसित किया जाए।

घटनाक्रम और मंदिर से जुड़ा विवरण

विवरण जानकारी
स्थान कंठाल चौराहा से छत्री चौक मार्ग, उज्जैन
प्रतिमा का काल परमार काल / राजा भोज का समय (बेसाल्ट पत्थर)
मुख्य कारण सिंहस्थ-2028 की तैयारी व सड़क चौड़ीकरण
प्रशासनिक योजना टंकी चौक पर पुनर्स्थापन
वर्तमान स्थिति 3D स्कैनिंग व ASI विशेषज्ञों से परामर्श की तैयारी

आस्था और विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती

सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम चल रहा है। हालांकि, ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के विस्थापन के दौरान जनआस्था का ध्यान रखना और प्राचीन पुरातात्विक मूर्तियों को क्षति से बचाना जिला प्रशासन के सामने एक बड़ी तकनीकी और सामाजिक चुनौती बन गया है।
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