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बकस्वाहा में अवैध रेत माफियाओं के ‘हाईटेक’ पैंतरे: अधिकारियों को देख बीच सड़क पर रेत पलटकर भागा डंपर; मुखबिर तंत्र और लंबी दूरी के ‘टीपी’ घोटाले पर उठे विधिक सवाल

बकस्वाहा में अवैध रेत माफियाओं के ‘हाईटेक’ पैंतरे: अधिकारियों को देख बीच सड़क पर रेत पलटकर भागा डंपर; मुखबिर तंत्र और लंबी दूरी के ‘टीपी’ घोटाले पर उठे विधिक सवाल

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The Khabrilal

Published On: Jul 5, 2026, 8:38 PM IST

Updated On: Jul 5, 2026, 8:38 PM IST

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बकस्वाहा/छतरपुर: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर जिले अंतर्गत आने वाले बकस्वाहा क्षेत्र में खनिज संपदा की लूट और अवैध रेत के काले कारोबार के खिलाफ प्रशासनिक विधिक हंटर पूरी आक्रामकता से चल रहा है। रविवार सुबह बकस्वाहा में एक बेहद चौंकाने वाला और हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब प्रशासनिक अमले की औचक दबिश की भनक लगते ही एक शातिर डंपर चालक विधिक कार्रवाई से बचने के लिए बीच सड़क पर ही पूरी रेत उड़ेलकर (पलटकर) वाहन सहित रफूचक्कर हो गया। इसके बाद राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल मुख्य मार्ग से रेत हटवाकर यातायात बहाल कराया और फरार वाहन की तलाश की विधिक कड़ियाँ तेज कर दी हैं।

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अफसरों की लोकेशन ट्रैक कर रहा माफिया का ‘लोकल इनपुट’; चौराहों पर तैनात हैं मुखबिर

लगातार हो रही विधिक जब्ती और छापों के बावजूद रेत का यह अवैध परिवहन पूरी तरह क्यों नहीं थम रहा है, इसे लेकर अंचल के सूत्रों ने कई सनसनीखेज विधिक कड़ियाँ उजागर की हैं:

  • लोकेशन ट्रैकिंग का खेल: स्थानीय स्तर पर यह विधिक चर्चा बेहद गर्म है कि रेत माफियाओं ने राजस्व, पुलिस और खनिज (Mining) विभाग के आला अधिकारियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए एक समानांतर मुखबिर तंत्र (Spy Network) खड़ा कर रखा है।
  • कार्रवाई से पहले अलर्ट: बकस्वाहा और आसपास के प्रमुख मार्गों, ढाबों और चौराहों पर ऐसे संदिग्ध लोग सक्रिय रहते हैं, जो सरकारी गाड़ियों का मूवमेंट होते ही इसकी लाइव लोकेशन तुरंत तस्करों तक पहुंचा देते हैं। यही कारण है कि टीम के पहुंचने से ठीक पहले ही अवैध रेत से लदे ओवरलोड ट्रक और हाइवा अपना रास्ता विधिक रूप से बदल लेते हैं।

बिना ट्रांजिट पास (TP) परिवहन और ‘लॉन्ग रूट टीपी’ का कथित दुरुपयोग; एक पास पर कई फेरों का आरोप

इस अवैध सिंडिकेट द्वारा सरकार के राजस्व को विधिक रूप से चूना लगाने के लिए अपनाई जा रही दो मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:

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  1. बिना वैध कागजात के परिवहन: क्षेत्रीय विधिक सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन बिना किसी वैध रॉयल्टी या ट्रांजिट पास के दर्जनों ट्रक आसपास के शहरी और ग्रामीण अंचलों में रेत की अवैध सप्लाई कर रहे हैं, जिससे सड़कों की सुरक्षा पर भी विधिक संकट खड़ा हो गया है।
  2. लंबी दूरी के पास का विधिक खेल: सबसे बड़ा लूपहोल लंबी दूरी के ट्रांजिट पास (TP) को लेकर सामने आ रहा है। दूर के जिलों के लिए जारी होने वाली लंबी समयावधि वाली टीपी का लाभ उठाकर, कुछ वाहन चालक निर्धारित विधिक मार्ग से हटकर उसी एक पास पर अतिरिक्त फेरे (Illegal Trips) लगा देते हैं।

वाहनों के GPS रिकॉर्ड और टीपी के मिलान की उठी विधिक मांग; किसी भी हाल में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं — नायब तहसीलदार सुनील कुमार

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी विधिक रणनीति की कड़ियाँ —

“रेत माफियाओं के इन नए पैंतरों का भंडाफोड़ करने के लिए अब प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा यह विधिक मांग उठाई जाने लगी है कि खनिज नाकों पर जब्त या गुजरने वाले संदेहास्पद वाहनों के मूल जीपीएस (GPS) लॉग रिकॉर्ड और विभाग द्वारा जारी ट्रांजिट पास की टाइमिंग का बारीकी से मिलान किया जाए, जिससे पूरे विधिक नेटवर्क का सच सामने आ सके.

इस पूरे मामले में बकस्वाहा के नायब तहसीलदार सुनील कुमार ने प्रशासन का कड़ा विधिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त निर्देशों के तहत क्षेत्र में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ यह जीरो-टॉलरेंस अभियान लगातार जारी रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी है कि राजस्व को विधिक नुकसान पहुंचाने वाले और कानून से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस विधिक घेराबंदी से बकस्वाहा के रेत सिंडिकेट की कमर कितनी टूटती है।”

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