रीवा: रीवा जिले के जवा जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोहाना में आयोजित एक विशेष ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण अंचल की व्यवस्थाओं की विधिक पोल खुलकर सामने आ गई. इस चौपालनुमा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए स्थानीय ग्रामीणों ने गाँव के विकास कार्यों में बरती जा रही लापरवाही, मूलभूत सुविधाओं के अभाव और शासकीय योजनाओं में अपात्रों को लाभ देने जैसी विभिन्न गंभीर विधिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीणों ने एक सुर में जिला प्रशासन और रीवा कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष विधिक जांच कराते हुए त्वरित समाधान की मांग की है.

बीच में छूटा नाली निर्माण बना मुसीबत, योजनाओं से पात्र हितग्राही वंचित
मीडिया के समक्ष ग्रामीणों ने सिलसिलेवार ढंग से अपनी विधिक और प्रशासनिक समस्याओं का पुलिंदा रखा:
- रास्तों पर बह रहा कीचड़: ग्रामीणों ने बताया कि गाँव में आधा-अधूरा कराया गया नाली निर्माण अब लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुका है. नालियों का विधिक निर्माण कार्य बीच में ही अचानक रोक दिए जाने से बारिश और घरों से निकलने वाला गंदा पानी मुख्य रास्तों पर जमा हो जाता है, जिससे पूरा रास्ता दलदल में तब्दील हो चुका है.
- लाड़ली बहना और आवास योजना में धांधली: कार्यक्रम में कई पात्र ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि वे पूरी तरह से विधिक रूप से पात्र हैं, इसके बावजूद उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ के विधिक लाभ से वंचित रखा गया है, जबकि कई रसूखदारों के नाम जोड़ दिए गए हैं.

आदिवासी बस्ती में बूंद-बूंद पानी का संकट; बिना सूचना के कागजों में हो रही ग्राम सभाएं
गाँव की आंतरिक राजनीति और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर दिखा:
- पूरी बस्ती में सिर्फ एक नल: सबसे हृदयविदारक स्थिति आदिवासी बाहुल्य बस्ती की सामने आई, जहाँ के लोगों ने बताया कि पूरे मोहल्ले के लिए केवल एक सार्वजनिक नल स्वीकृत है. उसके भी आए दिन खराब रहने के कारण महिलाओं और मासूम बच्चों को भीषण गर्मी व धूप में मीलों दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है.
- वृद्धावस्था पेंशन और मनरेगा में अनियमितता: आर्थिक रूप से लाचार कई वृद्धजनों ने बताया कि उनकी विधिक पात्रता होने के बाद भी महीनों से वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत नहीं की जा रही है. साथ ही मनरेगा (MGNREGA) के तहत मिलने वाले रोजगार, मस्टरोल और भुगतान प्रक्रिया में भारी वित्तीय विधिक अनियमितताओं के आरोप स्थानीय पंचायत अमले पर लगाए गए.
- गुपचुप हो जाती हैं बैठकें: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा ग्राम सभा की बैठकों की विधिक सूचना समय पर जानबूझकर सार्वजनिक नहीं की जाती, जिससे आम जनता अपनी विधिक राय नहीं रख पाती और अंदरखाने प्रस्ताव पास कर लिए जाते हैं.
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग; बृजेश, अशोक और मंझरिया देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण रहे मुस्तैद
प्रशासनिक हस्तक्षेप की आस और ग्रामीणों की विधिक लामबंदी —
“मीडिया संवाद के समापन पर गोहाना पंचायत के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया कि यदि जल्द ही इन जनसमस्याओं का जमीनी और विधिक निराकरण नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विधिक रूप से विवश होंगे. इस महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम में अपनी आवाज बुलंद करने वालों में मुख्य रूप से बृजेश सिंह, अशोक कुमार, मंझरिया देवी, रघुराजिया, छोटकी, सारिका, ऊषा, अशोक वर्मा, आशीष वर्मा, गोरेलाल बंसल सहित सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण विधिक रूप से मौजूद रहे. अब देखना होगा कि मीडिया में मामला सुर्ख़ियों में आने के बाद रीवा का जिला प्रशासनिक अमला इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की सुध लेने के लिए कब तक जमीनी विधिक कदम उठाता है.”







